यदि आपके हैं, बैंक में एक से ज्यादा अकाउंट तो ध्यान रखें कुछ बातों का

वर्तमान समय में सरकार के दिशा निर्देशनुसार अधिकतर लोगों के बैंक अकाउंट खोले गए है,जिससे रोजमर्या की दिनचर्या में कभी ना कभी आपको बैंक जाना ही पड़ता है,पर कुछ लोग ऐसे भी ही जिनके एक से ज्यादा भी अलग अलग बैंको में अकाउंट है,तो क्या आप भी उनमें से है यदि हा तो जानते है,एक से ज्यादा अकाउंट होने पर फायदा है,या नुकसान।

तो सबसे पहले हम देखते हैं की बैंक द्वारा चार या पांच ट्रांजैक्शन के बाद चार्ज लिया जाता है,यदि आपके पास एक से ज्यादा अकाउंट है,तो आप अल्टरनेट 5-5 करके कुल मिलाकर 10 ट्रांजैक्शन बिना किसी चार्ज के आसानी से कर सकते हैं,या किसी कारण से किसी एक बैंक का सर्वर या नेट डाउन हो तो आप दूसरी बैंक के अकाउंट से अपना कार्य संपन्न कर सकते हैं,एक और फायदा यह भी है.

किसी कारण से किसी एक बैंक का ब्याज कम है,तो उस बैंक से अपना पैसा ट्रांसफर कर दूसरी बैंक से ज्यादा ब्याज आप आ सकते हैं,इसके साथ ही दो अकाउंट होने से आप दोनों बैंकों की अलग-अलग चेेक बुक रख बिना किसी चार्ज के अपने चेको की संख्या बढ़ा सकते हैं,अत: यदि दो बैंकों में आपके अकाउंट है,तो उन्हें प्रॉपर तरीके से मैनेज करें और नुकसान से बचें।

यदि आपको जरूरत ना हो तो दो अकाउंट खुलवाने से बचना चाहिए,एक ही अकाउंट से अपनी दैनिक दिनचर्या के कार्य उसी अकाउंट से ऑपरेट करना चाहिए,क्योंकि यदि आपके एक से ज्यादा अकाउंट है, तो हर अकाउंट को मैनेज करनेे के लिए एक मिनिमम बैलेंस आप को रखना होगा,नहीं तो बैंक कुछ चार्जेस लगाती है,जिससे आपको आर्थिक नुकसान होगा।

इसलिए ज्यादा पैसा सेविंग अकाउंट में रखने की बजाएं अलग-अलग स्कीमों में लगाएंगे,तो आपको ज्यादा ब्याज की प्राप्ति होगी,इसके अलावा अधिक अकाउंट होने पर हर अकाउंट पर बैंक सालाना फीस लेता है जिससे हर अकाउंट पर आपको फीस देना होगी, इसके अलावा आपको हर बैंक के एटीएम कार्ड का पासवर्ड याद रखना होता है,और पासवर्ड भूल जाने पर आपको बैंक के चक्कर लगाने पड़ते जिससे समय का भी नुकसान होता है, इसके अलावा इनकम टैक्स फाइल करते समय हर बैंकिंग डिटेल आपको देना होती है,जिससे आपकी कागजी कार्रवाई थोड़ी पेचीदा हो जाती है। अतः आप विचार करें कि आपके लिए एक से ज्यादा अकाउंट जरूरी है या नहीं।

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