येशू के पहले ईसाई धर्म का ईश्वर कौन था? जानिए

ईसा ने कभी यह दावा नहीं किया कि मैं नये धर्म की स्थापना कर रहा हूं।वे यहूदी थेऔर अन्य सभी यहूदियों की तरह पारम्परिक मंदिर में जाते रहे जहां याहवेह ( जिहोवा) की पूजा होती थी। अतः हम कह सकते हैं कि ईसा तक इसी ईश्वर की पूजा करते थे। उनका झगड़ा पुरोहित समाज से था जो उनके अनुसार तोरैत की शिक्षाओं की ग़लत तरीके से दुनियावी व्याख्या करके पैसा कमाने में लगा हुआ था।

उन्होंने केवल यह कहा था कि तोरैत की शिक्षाओं का वास्तविक अर्थ वह है जो मैं बता रहा हूं। उनकी व्याख्या पूरी तरह आध्यात्मिक थी। इसे मानने से पंडों के पेट पर लात पड़ती थी।

अतः उन्होने शड़यंत्र करके झूठे आरोप लगाकर ईसा को सलीब पर चढ़वा दिया। हम कह सकते हैं कि ईसा और यहूदी पुरोहितों के सम्बन्ध वैसे ही थे जैसे दयानंद सरस्वती और पारम्परिक हिन्दू पंडों के। मृत्यु के कई वर्ष पश्चात जब ईसा के उपदेश समाज को स्वीकार होने लगे तो अनुयायियों ने स्वयं को यहूदियों से अलग धर्म घोषित कर दिया और ईसा को ही ईश्वर का अवतार मानकर पूजने लगे।

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