राजस्थान की सांसी जनजाति में कूकडी रस्म क्या है? जानिए

● सांसी जनजाति भारत की प्राचीनतम जनजातियों में से एक है। आज हम इस जनजाति में प्रचलित एक रस्म या कुप्रथा ‘कूकड़ी’ के बारे में जानेंगे।

• जनजातियों की भाँति हमारे समाज में भी अनेक कुप्रथाओं का प्रचलन आज भी हैं, जिन्हें रीति-रिवाज, परम्परा एवं संस्कारों का नाम देकर बढ़ावा दिया जाता है। जिससे कहीं-न-कहीं महिलाओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है। ऐसी ही एक रस्म है-‘कूकड़ी प्रथा’, जो सामान्यतः ‘सांसी जनजाति’ में प्रचलित है।

★ क्या है कूकड़ी रस्म ?

एक लड़की अपने परिवार को छोड़कर शादी करके ससुराल जाती है। वहाँ पर सुहागरात की रात उसका पति हाथों में सफेद धागों का गुच्छा लिए उसके कमरे में प्रवेश करता है। यह देखकर वह लड़की डर के मारे घबरा जाती है। उसके ज़हन में वे बातें सहसा याद आ जाती हैं, जो अपने घर व आस-पड़ोस की औरतों से हमेशा से सुनती आई है। पति यह जाँच करने वाला है कि उसकी पत्नी वर्जिन है या नहीं ?

• यह सोचकर उसके पूरे शरीर में शिहरन दौड़ जाती है, क्योंकि वो नहीं जानती है कि उसके साथ अब आगे क्या होने वाला है। यह सोचकर वह रोने लग जाती है। उस पलंग पर सफेद चादर बिछी हुई है एवं पति द्वारा लाई गई उस कुकड़ी को बिस्तर पर रखा जाता है। ततपश्चात पति उस लड़की के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाता है।

• सुबह उस बिस्तर पर बिछी चादर व कुकड़े को देखा जाता है। उसका पति वो गुच्छा लेकर कमरे से बाहर जाता है और वह चिल्ला-चिल्लाकर यह कहता है कि ‘अरे! वो ख़राब है।’

• इतना सुनते ही लड़के के घर वाले अब उस नई दुल्हन से उसके मित्र का नाम पूछते हैं। लड़की रो-रोकर यही कहती जाती है कि उसने कभी ऐसा कुछ नहीं किया है। जब बिस्तर पर खून के निशान नहीं मिलते हैं, तब परिवार वाले उस लड़की के साथ मारपीट एवं पशुवत व्यवहार करते हैं।

• ससुराल वाले उसको खूब पीटते हैं और यह कहते हैं, कि पंचायत के सामने वो झूठा ही मान ले कि उसके जीजा के साथ शारीरिक सम्बन्ध थे।

• अगर उसकी पत्नी वर्जिन निकलती है, (बिस्तर पर खून के निशान मिलने पर भी) तब भी उसे झूठ बोलने पर मजबूर किया जाता है और पीहर पक्ष वालों से ज्यादा दहेज के लिए बाध्य किया जाता है।

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