राजस्थान में गधों का मेला कहाँ लगता है?

क्या आपने कभी गधों के मेले के बारे में सुना है? उम्मीद है कि नहीं सुना होगा। लेकिन राजस्थान में एक ऐसी जगह भी है, जहां पिछले 500 साल से गधों का मेला लग रहा है। ये जगह है जयपुर के पास भावगढ़ बंध्या गांव। इस बार ये मेला अक्टूबर में लगेगा। नेता और सरकारी अधिकारी नहीं करते हैं मेले का उद्घाटन…

  • मेले के उद्घाटन करने के लिए कोई नेता, मंत्री या सरकारी अधिकारी नहीं आते हैं। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जिसने भी इस मेले का उद्घाटन किया, उसने अपना पद खो दिया।
  • मेले में न सिर्फ राजस्थान से बल्कि यूपी, मप्र, आदि से भी गधे बिकने आते हैं। इनके खरीददार भी कई राज्यों से यहां आते है।
  • गधों को खरीदने के लिए कश्मीर ,कन्याकुमारी से भी खरीददार आते है ।
  • मेले में गधों और खच्चरों के अलावा और कोई जानवर नहीं लाया जाता है ।

युद्ध जीतने की खुशी में मनाया जाता है ये मेला

  • कहा जाता है कि मेले की शुरुआत 500 साल पहले कछवाहों ने की थी। उस वक्त कछवाहों ने चान्द्रा मीणा को एक युद्ध मे हराया था और उस खुशी में कछवाहों ने इसकी शुरुआत की।
  • ये मेला गांव की सालों से खालकानी माता की पचास एकड़ जमीन पर लगाया जाता है।
  • पहले इस मेले में करीब 25 हजार से भी ज्यादा गधे बिकने आते थे, लेकिन वक्त के साथ ये संख्या कम हो गई।अब महज 5 हजार गधे ही मेले में करने आते हैं।

एंटरटेनमेंट के लिए होती है गधों की रेस

  • इस मेले में लोगों के एंटरटेनमेंट के लिए गधों और घोड़ों की रेस होती है। मेले को रोचक बनाने के लिए कई तरह के प्रोग्राम होते हैं।
  • मेले में आए गधों को साबुन से नहलाया जाता है। इतना ही नहीं, उनके शरीर पर कई प्रकार की डिजाइन बनाई जाती है। गधों को फूलों की माला से सजाया जाता है।

मेले मे आते है कई ब्रीड के गधे

  • राजस्थान के इस अनोखे मेले में काठियावाड़ी ब्रीड के गधे आते है जो दिखने में बहुत सुंदर होते हैं।
  • वहीं, मालाणी और सांचोरी गधे ऐसी ब्रीड होती है जो काफी मजबूत होते हैं। इन गधों की अच्छी मांग होती है।
  • मेले में आने वाले गधों की कीमत 500 रुपए से लेकर 2 हजार तक होती है।

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