लड्डू गोपाल की स्थापना कैसे करें?

आजकल लड्डु गोपाल हर घर में है. और अगर आप भी लड्डु गोपाल को घर में लाना चाहते है तो उन्हें घर में लाने के लिए आपको किन-किन बातो का ध्यान रखना चाहिए इस बारे में बताया गया है. लड्डु गोपाल की अगर आप सच्चे मन से सेवा करे तभी आप घर में लड्डु को लाए, क्योकि लड्डु घर में लाने के बाद हमारे घर के सदस्य ही बन जाते है. और अगर हम लड्डु गोपाल को अपने बच्चो की तरह प्यार करे और सेवा करे तो लड्डु आप की हर मनोकामना पूरी करते है. अगर हम एक बार लड्डु घर पर ले आये तो हमें हर हाल में उनका ख़ास ख्याल रखना है.

*लड्डु गोपाल की स्थापना कैसे करे*

वैसे तो आजकल लड्डु गोपाल बाजार हर जगह मिल जाते है. लेकिन माना जाता है की यदि हमें लड्डु गोपाल कोई उपहार में दे तो ज्यादा शुभ माना जाता है. लड्डु गोपाल की प्रतिष्ठा की प्रक्रिया चार दिनो तक चलती है. पहले दिन लड्डु गोपाल को अपना मानते हुए लड्डु गोपाल का एक अच्छा सा नाम रखे और लड्डु गोपाल को प्यार के साथ एक अनाज से भरे बर्तन मे रखे. अनाज में आप गेहू, चावल, इत्यादि कुछ भी ले सकते है. और उस बर्तन मे लड्डु को अनाज से पूरा ढक दें व उनकी आखों पर एक पट्टी भी बाँध दे. फिर दूसरे दिन नहा कर नित्यकर्म करने के बाद ब्रह्म मुहूर्त में अपनी आखें बंद कर के प्यार से अपने लड्डु को बाहर निकाले , उनकि पट्टी खोले और प्यार से लड्डू को निहार कर उनको एक बर्तन में रखकर बर्तन में सभी तरह फल रखें. फिर तीसरे दिन नहा धोकर ब्रह्म मुहूर्त में लड्डू को फलों के बर्तन से निकाल कर सब्जी के बीच में लड्डू को रखा जाता है. और इसी तरह चौथे दिन लड्डू को फूलों में रखा जाता है.

अगर आप लड्डू को जन्माष्टमी पर स्थापित करना चाहते हैं तो आप यह चारों प्रक्रिया 1-1 घंटे के अंतर में 1 दिन में कर सकते हैं.

तो अब 4 दिन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पांचवें दिन आप लड्डू को नहा धोकर फूलों के बर्तन से निकाल कर उन्हें खाली परात या थाली में बैठा कर पहले उन्हें कच्चे दूध से नहलाये और ध्यान रहे कि लड्डू को अपना बच्चा समझ कर घर के सदस्य समान पूरी भावना और प्यार के साथ नहलाएं। पहले दही, चीनी फिर शहद और आखिर में थोड़ा सा घी लगाकर प्यार से मसलकर नहलाएं और आखिर में गंगाजल मिले सादे जल से नहलाये । जल मौसम के अनुसार ले. गर्मी में शीतल जल और सर्दी में गुनगुना जन ले. फिर लड्डू को एकदम साफ मलमल के कपड़े या सूती रुमाल से साफ करके वस्त्र पहनाएं। वस्त्र नये होने चाहिए, फिर उनको चंदन का तिलक लगाएं। फिर इत्र लगाएं और फिर लड्डू को गहनों से सजाएं और लड्डू को उसकी बांसुरी बहुत प्यारी होती है तो नई बांसुरी रखें।

*लड्डू को खाना कैसे खिलाएं*

जैसा कि सबको पता है लड्डू को माखन मिश्री पसंद होती है. तो लड्डू को पहले माखन मिश्री का भोग लगाएं फिर दूध का भोग लगाएं। लड्डू को दिन में चार बार दूध का भोग लगाएं और दोपहर में बिना प्याज लहसुन के भोजन का भोग लगाएं। भोजन सबसे पहले लड्डू को खिलाएं फिर लड्डू का भोग लगा भोजन बाकी पूजन में मिलाकर बाकी जनों को करवाएं।

*लड्डू की पूजा कैसे करें*

लड्डू गोपाल की पूजा करते समय सबसे पहले हम जो भी पूजा करें सच्चे दिल से और मन से करनी चाहिए। पहले लड्डू को चंदन का तिलक लगाएं फिर धूप जलाकर पूजा करें। लड्डू को फूल अर्पित करें। और फिर आरती करें। लड्डू की आरती दोनों समय करनी चाहिए। सुबह और शाम को आरती करें वह रात को लड्डू को दुलार करके सुलाएं और जैसे कि सबको पता है लड्डू को राधा नाम बहुत अच्छा लगता है तो लड्डू को सुलाते हुए उठाते समय राधे-राधे जरूर बोलें।

*लड्डू गोपाल की आरती कैसे करें*

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में नहा धोकर लड्डू गोपाल को प्यार से उठाएं श्री लड्डू गोपाल जी को पानी पिला कर उन्हें प्यार से राधे राधे बोले और फिर उन्हें नया लाकर स्वच्छ वस्त्र पहनाएं. फिर उन्हें चंदन का तिलक और इत्र लगाकर उनका श्रृंगार करें और फिर उन्हें फूल चढ़ाएं व धूप जलाकर उनकी पूजा करें। और फिर अपने लड्डू को माखन मिश्री दूध और मेवे का भोग लगाएं फीर लड्डू जी की आरती शुरू करें।

*आरती*

आरती बालकृष्ण की कीजे ।

अपना जनम सफल करि लीजे ।।

श्री यशोदा का परम दुलारा ।

बाबा की अखियन का तारा ।।

गोपिन के प्राणन का प्यारा ।

इन पर प्राण निछावर कीजे ।।

आरती बालकृष्ण की कीजे ।

बलदाऊ का छोटा भैया।

कान्हा कहि कहि बोलत मैया ।।

परम मुदित मन लेत वलैया ।

यह छबि नैनन में भरि लीजे ।।

आरती बालकृष्ण की कीजे ।

श्री राधावर सुघर कन्हैया।

ब्रज जन का नवनीत खवैया।।

देखत ही मन नयन चुरैया ।

अपना सरबस इनको दीजे।।

आरती बालकृष्ण की कीजे।

तोतरि बोलनि मधुर सुहावे ।

सखन मधुर खेलत सुख पावे ।।

सोई सुकृति जो इनको ध्यावे।

अब इनको अपनो करि लीजे।।

आरती बालकृष्ण की कीजे ।

*लड्डू गोपाल को कैसे सुलाए*

लड्डू को दोपहर में भी बिना प्याज लहसुन के भोजन का भोग लगाएं और शाम को दूध का भोग लगाएं। फिर रात को भी दूध का भोग लगाकर लड्डू को दुलार से प्यार से थपकी देकर सुला दे व अगले दिन फिर से वैसे ही पूजा किया करें। आजकल लड्डू गोपाल के लिए तरह-तरह के वस्त्र, सिंहासन, बिस्तर, पगड़ी, मुकुट इत्यादि मिलते हैं

हर जन्माष्टमी को उस मूर्ति को बदल कर दूसरी मूर्ति लाई जाती है। लड्डू गोपाल जी का एक छोटे बच्चे की तरह लालन पालन किया जाता है और उसका उसका ख्याल रखा जाता। लड्डू गोपाल जी को घर मे रखने के कुछ जरूरी नियम होते हैं जिनका ख्याल रखना बहुत ही जरूरी होता है।

1. इन नियमों का पालन करें

आम तौर पर सभी हिंदू घरों में रोजाना लड्डू गोपालजी की पूजा की जाती है, उन्‍हें नहलाया जाता है, वस्‍त्र पहनाए जाते हैं और भोग लगाया जाता है। भगवान की पूजा से जुड़े भी कई नियम होते हैं। जिन घरों में लड्डू गोपाल की पूजा होती है उन घरों में इन नियमों का पालन करना जरूरी होता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे 5 नियमों के बारे में जो घर में लड्डू गोपाल हैं तो इन नियमों को जरूर करें।

2. नियमित स्नान कराएं, हर दिन वस्त्र बदलें

अगर आप भी लड्डूगोपालजी को अपने घर में ला रहे हैं तो सर्वप्रथम आपको अपने मन में यह भाव पैदा करना चाहिए कि अब यह आपका नहीं बल्कि लड्डूगोपालजी का घर है और बाकी लोगों की तर‍ह लड्डूगोपाल भी इस घर के सदस्‍य हैं। उसके बाद रोजाना नियम से उन्‍हें सुबह ही स्‍नान कराएं और रोजाना उनके वस्‍त्र बदलें। ध्‍यान रहे कि हमें लड्डूगोपालजी के लिए ठीक उसी प्रकार की दिनचर्या का पालन करना चाहिए, जैसा कि घर के बाकी सदस्‍य करते हैं। वह भी आपके घर के सदस्‍य हैं।

3. सबसे प्‍यारा और राजदुलारा सदस्‍य

अगर आप बाहर से खाने-पीने की कोई वस्‍तु या फिर अन्‍य चीजें लेकर आ रहे हैं तो पहले घर के सबसे छोटे सदस्‍य लडडूगोपालजी का भोग जरूर लगाएं। उन्‍हें घर का सबसे प्‍यारा और राजदुलारा सदस्‍य माना जाता है। यह मानते हुए घर में बनने वाले सभी पकवानों या फिर खाने की सभी वस्‍तुएं पहले उन्‍हें भोग लगाएं।

4. संध्‍या आरती और झूला

संध्‍या के समय रोजाना नियमित रूप से संध्या आरती करें और भोग लगाएं। लड्डू गोपाल जी की पूजा में एक भी दिन का अंतराल नहीं होना चाहिए। अगर आप किसी काम से घर के बाहर जा रहे हैं तो इस बात का ध्‍यान रखिये कि घर की एक चाभी लड्डू गोपाल को देकर जाएं और ये प्रार्थना जरूर करके जाएं कि हे,प्रभु आप इस घर की रक्षा करना। आप चाहें तो ऐसा भी कर सकते हैं कि अपने किसी करीबी पड़ोसी को लड्डू गोपालजी को सोंपकर जाएं ताकि वह रोजाना उनका भोग और पूजा कर सके और उनका ध्यान रखें।

5. खिलौने भी लाएं

हम जब भी कहीं बाजार जाते हैं तो घर के बच्चों के लिए खिलौने लेकर आते हैं, उसी प्रकार जब आप बाजार जाएं तो जैसे अपनों बच्‍चों के लिए खिलौने लाते हैं वैसे ही लड्डूगोपाल जी के लिए भी नए-नए खिलौने लेकर आएं और समय निकालकर स्‍वयं भी उनके साथ खेलें। हो सके तो लड्डू गोपालजी को अपने साथ समय-समय पर घुमाने भी लेकर जाएं।

6. दिन में 4 बार लगाएं भोग

जिस प्रकार से घर के बाकी सदस्‍य सुबह स्‍नान के बाद नाश्‍ता करते हैं फिर दोपहर में भोजन और शाम को फिर जलपान और रात में भोजन, ठीक इसी प्रकार से लड्डू गोपालजी का भी कम से कम 4 बार भोग लगाना जरूरी है। माना जाता है कि जिस प्रकार छोटे बच्‍चों को बार-बार भूख लगती है, वैसे ही लड्डू गोपालजी को भी भूख लगती है और उन्‍हें भी समय-समय पर खिलाना जरूरी होता है।

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