विभिन्न देश अपना स्वर्ण भण्डार कहाँ रखते हैं ?

स्वर्ण भण्डार किसी देश की सरकार के अधीन सुरक्षित स्वर्ण की विशाल मात्रा होता है. संयुक्त राज्य अमेरिका सरकार के पास स्वर्ण का सबसे बड़ा भण्डार है, जिसकी मात्रा 8133.5 मीट्रिक टन (स्वर्ण की लगभग 6,55,000 छड़ों के बराबर) है. वही, भारत इस सूची में 11वें स्थान पर है, जिसके पास 557.8 मीट्रिक टन (स्वर्ण की लगभग 45,000 छडें) स्वर्ण भण्डार है.

अधिकाँश स्वर्ण, स्वर्ण मानक की समाप्ति के बाद बची विरासत है, और आजकल विभिन्न सरकारें इन स्वर्ण भण्डार को अपनी मुद्रा को जोखिम से सुरक्षित करने के साधन के रूप में रखतीं हैं. इतना अधिक स्वर्ण रखने के साथ इस बहुमूल्य धातु के भंडारण की सुरक्षा की चिंता जुड़ी रहती है. सरकारों द्वारा अपना स्वर्ण भण्डार रखने के लिए अलग-अलग बैंकों के नेटवर्क में विभाजित कर दिया जाता है, ताकि उनके भण्डार की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

हालांकि पहली नजर में, समस्त स्वर्ण को यथासंभव अपने पास रखने की बात तार्किक लग सकती है, फिर भी अनेक देश अपना स्वर्ण भण्डार विदेशों में रखते हैं. किन्तु, इसका कारण यह है कि यह एक देश द्वारा दूसरे देश को लेन-देन का भुगतान स्वर्ण में करने का पश्च-प्रभाव है. टनों स्वर्ण को दुनिया भर में यहाँ से वहाँ पहुंचाना एक जोखिम-भरा काम होता है. इसलिए, अधिकतर देश दूसरी सरकारों को उनके स्वर्ण भण्डार का कुछ स्वामित्व इन्हें हस्तांतरित कर देने को कहती हैं, जबकि स्वर्ण का भौतिक भण्डार अपने देश में रखती हैं.

संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, और इटली – विश्व में सबसे बड़ी स्वर्ण भण्डार वाले शीर्ष 3 देश – अपना कम से कम 68% स्वर्ण विदेशी भण्डार में रखते हैं, जबकि भारत, चीन, और रूस अपना क्रमशः 6.3%, 2.2% और 15% स्वर्ण भण्डार विदेशों में रखते हैं. तथापि, प्रौद्योगिकी की प्रगति और स्वर्ण के सीमापार परिवहन प्रबंधन में जोखिम घटने के कारण, अनेक देशों ने इस प्रचलन को बदलना आरम्भ कर दिया है. अब अधिक देश इस बहुमूल्य धातु को अपने देश में वापस ला रहे हैं.

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