वैशाली की नगरवधू कौन थी? जानिए उनके बारे में कुछ रोचक बातें

वैशाली की नगर बधू को आप एतिहासिक और काल्पनिक दोनों कह सकते हैं क्युकी लेखक ने संकर्तिक और ऐतिहासिक अध्ययन के बाद बेहद अच्छा उपन्यास लिखा हैवैशाली की नगरवधू, आचार्य चतुरसेन का चर्चित उपन्यास है जिसकी गणना हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में की जाती है

वैशाली और मगध। मगध आर्य जाति का प्रतीक है, साम्राज्‍य (वादी) है। उसमें राजतंत्र है। राजा की इच्‍छा ही वहाँ कानून है। उसमें प्रायः अधिकारों की बात की जाती है। दूसरी तरफ वैशाली है जो मिश्रित जातियों का प्रतिनिधित्‍व करती है। उसमें गणतंत्र है, चुनी हुई राज्‍य-परिषद् का मत उसके लिए कानून है।

उसमें अक्‍सर कर्त्‍तव्‍यों की बात की जाती है। उपन्‍यास वस्‍तुतः मगध और वैशाली के रूप में साम्राज्‍य और गणतंत्र के टकराव को रूप देता है।महानामन वैशाली के प्रहरी-प्रमुख हैं। उनको आम के पेड़ के नीचे एक नवजात कन्‍या मिली। इसलिए उन्‍होंने उसका नाम रखा- अम्‍बपाली। अम्‍बपाली ने उनको अड़तीस साल के बाद पिता बनने का सुख दिया। वे वैशाली की नौकरी छोड़ गाँव में कन्‍या का पालन-पोषण करने लगे। कारण यह कि अम्‍बपाली अत्यन्त सुन्दर थी।

वैशाली में कानून था कि उसकी सर्वाधिक सुन्दर कन्‍या उसकी नगरवधू/जनपद-कल्‍याणी बनेगी। उसे सभी राजकीय सुवि‍धाएँ मिलेंगी पर साधारण स्‍त्री की तरह अपनी पसन्द के पुरुष से विवाह करने, बच्‍चे पैदा करने और घर बसाने का अधिकार नहीं होगा।इसलिए महामान ने आम्रपाली को सबकी नजर से दूर रखा था परंतु सुंदरता छुपी न रही फिर वे वेशाली अअ गए अंततः आमपाली को नगर बधू बनना पड़ा था कुल मिलाकर पुरुषों के द्वारा किसी नारी के शोषण पर यह घटना उपन्यास के माध्यम से रखी गई

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