शैम्पू कंपनियों द्वारा खरगोशों पर कौन-सा प्रयोग किया जाता है और क्यों किया जाता है? जानिए

आप मे से अधिकतर लोग यह नहीं जानते कि जो ब्यूटी कॉस्मेटिक उत्पादों का आप इस्तेमाल करते हैं।उन्हें आप तक पहुंचने से पहले कंपनियां बेजुबान जानवरों जैसे ख़रगोश, बिल्ली, चूहे आदि पर परीक्षण करती हैं।

सौन्दर्य प्रसाधन बनाने वाली कंपनियां भले ही दावा करें कि इनसे इंसानी त्वचा और इंद्रियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता, लेकिन एक दूसरी सच्चाई यह भी है कि कई सौन्दर्य प्रसाधनों के निर्माण में कंपनियां सैकड़ों नन्हे जीवों को बेहद निर्दयता के साथ परीक्षण की प्रक्रिया से गुजारती हैं, जहां ये मारे भी जाते हैं।

ऎसे में इंसानी सौन्दर्य निखारने का दावा बेजुबान जीवों की जान लेने का कारण भी हो सकता है।

अब एक अच्छी खबर यह है कि भारत की ओर से सौैन्दर्य प्रसाधन उत्पादों के लिए होने वाली “एनिमल टेस्टिंग” पर रोक लगा दी गई है। भले ही यह एक छोटा-सा कदम दिख रहा हो, लेकिन इससे बड़े पैमाने पर उन कार्यकर्ताओं को उत्साह मिलेगा जो वैश्विक कंपनियों पर कॉस्मेटिक टेस्टिंग के लिए पशुओं के बजाए अन्य विकल्पों को अपनाने के लिए दबाव बना रहे हैं।

“बी क्रुएलिटी फ्री इंडिया” कैम्पेन के बाद ऎतिहासिक घोषणा
विश्वभर में एनिमल एक्टिविस्ट जानवरों को सौन्दर्य प्रसाधन उत्पादों और उनमें शामिल सामग्रियों के परीक्षण के विरोध में हैं।

युमेन सोसाइटी इंटरनेशनल के “बी क्रुएलिटी फ्री इंडिया” के साथ रेड क्रॉस और फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशन आदि संस्थाओं ने गहन अभियान चलाया, जिसे सांसदों और विधायकों का सहयोग मिला।

इस ऎतिहासिक घोषणा के बाद भारत दक्षिण एशिया के देशों में पहला देश बना, जिसने पशुओं पर कॉस्मेटिक टेस्टिंग को बैन किया है।

बड़ी बड़ी कंपनियों जैसे यूनिलीवर, जॉनसन एंड जॉनसन आदि द्वारा किये जाने वाले “प्रयोगों” के उदाहरण:

शेविंग फोम: यह जानवरों के पेट में दबाव के लिए डाल दिया जाता है।
स्प्रे: जब तक कॉमा हासिल नहीं किया जाता है तब तक पदार्थ श्वास लेता है।
शैम्पू: जानवरों को इसे निगलना पड़ता है और खरगोशों की आंखों में ध्यान केंद्रित किया जाता है।
मंजन: खरगोश, चूहों और गिनी सूअरों को इसे निगलना पड़ता है।
मास्क और आई छाया: यह कुल अंधापन तक खरगोशों की आंखों में पेश किया जाता है।
मेकअप: संवेदनशील जानवरों की त्वचा पर फैलता है।
कॉन्टैक्ट लेंस: यह खरगोशों की आंखों में पेश किया जाता है, जो मानव आंखों से अधिक संवेदनशील होता है।
साबुन: जानवरों की त्वचा को जलन सहने पर मजबूर किया जाता है।

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