सरदार वलभ भाई पटेल को क्यों याद किया जाता है ?

सरदार वल्लभभाई पटेल एक ऐसा नाम जिसके बिना हम आज के भारत की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।सरदार पटेल गांधी जी के सच्चे अनुयाई थे,नैतिकतावादी और सत्य के पुजारी थे लेकिन चारित्रिक अच्छाईयों के अलावा उन्होंने जो देश के लिए किया वह अविस्मरणीय है।हम ज्यादा पीछे न जा कर आजादी के समय से ही शुरुआत करते हैं।

वर्ष 1946 अन्ग्रेजी सरकार ने भारत की कार्यकारी सरकार की पेशकश की जिसमें नेहरू जी प्रधानमंत्री और पटेल गृहमंत्री बने।इस सरकार में मुस्लिम लीग की भी भागेदारी करने को तैयार हो गई लेकिन उसने गृहमंत्री का पद मांगा।

कई इतिहासकार बतातें हैं कि नेहरू इसके लिये तैयार हो गये थे लेकिन पटेल ने साफ तौर पर इंकार कर दिया क्योंकि वह समझते थे कि अगर मुस्लिम लीग का गृहमंत्री होगा तो वह अपने मंसूबे पूरा करने में सफल हो जायेंगें और दंगों को कोई नहीं रोक पाता और अन्त में मुस्लिम लीग ने ऐसा ही किया लेकिन सरदार पटेल की दूरगामी सोच के कारण कम से कम हानि तक दंगे रुके क्योंकि गृहमंत्री सरदार पटेल थे।

तत्पश्चात जून 1947 को अन्ग्रेजी सरकार ने अगस्त में भारत आजादी की घोषणा कर दी साथ ही भारत,पकिस्तान के साथ-साथ रियासतों को भी स्वतंत्र घोषित कर दिया।अब मात्र तीन महीने के समय में 600 रियासतों का भारत में विलय की जिम्मेदारी पटेल ने लेते हुए अधिकांश रियासतों को भारत संघ में विलय कर अखंड भारत का निर्माण किया ।।यहीं नहीं हैदराबाद हो या जूनागढ़ सरदार ने अपनी दूरगामी सोच और दृढ़ता के साथ भारत को एक किया ।।

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