हाइड्रोजन बम बनाने की शक्ति किन किन देशों के पास है?

हाइड्रोजन बम

हाइड्रोजन बम को थर्मोन्यूक्लियर बम या एच-बम भी कहा जाता है। हाइड्रोजन बम में Deuterium और Tritium का इस्तेमाल किया जाता है। हाइड्रोजन बम आइसोटोप्स के आपस में मिलने के सिद्धांत पर काम करता है। ये वही सिद्धांत है जो सूर्य के गर्भ में निरंतर चलता रहता है। हाइड्रोजन बम के विस्फोट से असीमित ऊर्जा निकलती है। विस्फोट से निकली गर्मी सूरज के तापमान के बराबर होती है।

किन देशों के पास है हाइड्रोजन बम

हाइड्रोजन बम फिलहाल आधिकारिक तौर पर अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस, भारत, पाकिस्तान और इजरायल के पास है। उत्तरी कोरिया के भी हाइड्रोजन बम के सफल परीक्षण की बात सामने आती है, लेकिन उसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। अमेरिका ने पहली बार 1952 में हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया था। मार्शल द्वीप के बिकिनी अटॉल में अमेरिका ने हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया था। इस परीक्षण की वजह से यहां विशाल गड्ढे का निर्माण हुआ। इसके साथ ही यहां की कोरल रीफ बुरी तरह से प्रभावित हुईं।

अमेरिका का हाइड्रोजन बम

1953 में रूस ने खुलेआम स्वीकार कर लिया कि उसने हाइड्रोजन बम हासिल कर लिया है और उसका सफल परीक्षण भी किया है। इसके पीछे रूस के फीजिसिस्ट एंद्रेई सखारोव का बड़ा हाथ था। हाइड्रोजन बम को डिजाइन करने वाले एंद्रेई सखारोव ही थे।

रूस ने जिस हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया था, उसमें 400 किलोटन विस्फोट का इस्तेमाल हुआ था। ये नागासाकी और हिरोशिमा में गिराए गए परमाणु बम से 26 गुना ज्यादा ताकतवर था।

जब रूस अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाने में लगा था

अमेरिकी के जापान पर किए परमाणु बम हमले के बाद रूस ने अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने शुरू किए। 29 अगस्त 1949 को रूस ने पहली बार परमाणु बम का परीक्षण किया था। रूस ने इस परीक्षण को एक कोड नेम दिया था। वो कोड नेम था- आरडीएस 1।

रूस के कजाकिस्तान प्रांत में परमाणु बम का परीक्षण हुआ। 22 किलोटन वजनी हाइड्रोजन बम के विस्फोट से धरती हिल उठी थी।

1945 में हिरोशिमा और नागासाकी में अमेरिकी परमाणु बम हमले के बाद रूस में बेचैनी थी। वो किसी भी तरह से परमाणु क्षमता में अमेरिका से आगे निकलना चाहता था। रूस की सरकार ने इसके लिए 5 साल का लक्ष्य रखा था। रूस के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट में एक युवा वैज्ञानिक इगोर कुर्चातोव को लगाया गया। इगोर ने ही इस प्रोजेक्ट को लीड किया।

समूची मानव जाति का विनाश कर सकता है हाइड्रोजन बम

रूस का आरडीएस 1 अमेरिकी बम फैट मैन की तरह का था। फैट मैन को अमेरिका ने नागासाकी पर गिराया था। जिसके बाद वहां भयावह तबाही हुई थी। रूस ने अपने जासूसों के जरिए अमेरिकी न्यूक्लियर प्रोजेक्ट की जानकारी हासिल कर ली थी। अमेरिका का मैनहट्टन प्रोजेक्ट और 16 जुलाई 1945 के ट्रीनीटी टेस्ट की डिटेल्स रूस के पास थी। रूस ने अमेरिकी टेक्नोलॉजी को हैक कर लिया था।

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