हाइपर लूप ट्रेन भारत में कब शुरू होगी? जानिए

क्या है ‘हाइपरलूप’?

एक ट्यूब के भीतर ‘हाइपरलूप’ को उच्च दबाव और ताप सहने की क्षमता वाले इंकोनेल से बने बेहद पतले स्की पर स्थिर किया जाता है। इस स्की में छिद्रों के जरिये दबाव डालकर हवा भरी जाती है। जिससे कि यह एक एयर कुशन की तरह काम करने लगता है। स्की में लगे चुंबक और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक झटके से ‘हाइपरलूप’ के पॉड को गति दी जाती है।

पोर्टेशन की इस तकनीक में बड़े-बड़े पाइपों के अंदर वैक्यूम जैसा वातावरण तैयार किया जाता है यानी उनमें से हवा को पूरी तरह से निकाल दिया जाता है, ताकि भीतर घर्षण न हो।

इन वाहनों में पहिए नहीं होते है। वे खाली स्थान में तैरते हुए आगे बढ़ते हैं।

क्या है इसकी खासियत

  1. पायलट की त्रुटि और मौसम संबंधी खतरों से बचने के लिए हाइपरलूप को स्वचालित वाहन के रूप में विकसित किया गया है। यह एक स्वच्छ प्रणाली है, क्योंकि इसमें से कार्बन का उत्सर्जन नहीं होता है।इसके साथ ही इसमें बिजली भी कम खर्च होती है।
  2. खतरनाक ग्रेड क्राॅसिंग से बचने और वन्यजीवों को हानि से बचाने के लिए इसका निर्माण भूमिगत सुरंगों या जमीन के ऊपर स्तंभों पर किया जाता है।

3.अमेरिका में सबसे पहले न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन के बीच हाइपरलूप ट्रेन सिस्टम चलाया जाना है। इस ट्रेन सिस्टम के चल जाने के बाद वॉशिंगटन से न्यूयॉर्क का सफर मात्र 30 मिनट में किया जा सकेगा। यह पॉड सिस्टम कमर्शियल जेट फ्लाइट से दोगुना और हाई-स्पीड ट्रेन से 4 गुना तेज है। इसकी स्पीड जापान की बुलट ट्रेन से भी दोगुनी है।

  1. भारत के लिहाज से बात करें, तो पुणे और मुंबई के बीच अभी 3 से 4 घंटे सफर में लगते हैं। हाइपरलूप ट्रेन से तो ये यात्रा 20-25 मिनट में ही हो जाए।

दिल्ली-मुंबई के बीच हाइपरलूप का प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार, कंपनी के प्रतिनिधियों ने दिल्ली से मुंबई के बीच 1300 कि.मी. लंबी दूरी पर इस ट्रेन को चलाने का प्रस्ताव है। वर्जिन ग्रुप ने पहले मुंबई और पुणे के बीच ट्रेन चलाने को लेकर अपना प्रस्ताव दिया था, जिसे तत्कालीन भाजपा सरकार से मंजूरी भी मिल चुकी थी। प्रोजेक्ट के पहले फेज में 11.8 कि.मी. लंबा ट्रैक बनता, जिसकी लागत 10 अरब डॉलर थी। इसे बनने में 2.5 साल का वक्त लगता।

मेरी राय – बुलेट ट्रेन बनाने में ही जापान से लिए गए ऋण 1 लाख करोड़ का है। आरटीआई से पता चला है कि मुंबई से अहमदाबाद की ट्रेनों में 3 महीने के दौरान 40 प्रतिशत और अहमदाबाद से मुंबई की ट्रेनों में 44 प्रतिशत सीटें रिक्त थीं। मुंबई से अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भी घाटे का सौदा होने के लक्षण दिखाई दे रही है इसलिए हाइपरलूप बनने में लगने वाले बेहताशा खर्च को देखते हुए इसके बारे में अभी सोचना भी नहीं चाहिए।

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