हेलीॉप्टर शॉट का इजात कैसे हुआ? जानिए

भारतीय क्रिकेट टीम में 11 साल गुजारने के बाद भी कैप्टन कूल महेन्द्र सिंह धोनी अभी भी फिट एंड फाइन हैं। अपनी चुस्त-दुरुस्त बॉडी और फिटनेस के बल पर धोनी हमेशा अपने खेल में कुछ नया करते रहते हैं। इसी क्रम में धोनी ने अपने हेलीकॉप्टर शॉट का भी इजात किया था। धोनी के हेलीकॉप्टर शॉट के खोज की कहानी भी बेहद खास और दिलचस्प है।

पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में धोनी के दोस्त आज भी उन्हें एक ऐसे पहलवान क्रिकेटर के रूप में याद करते हैं जो अपने बल्ले से सीधे गेंद को स्टेडियम के पार पहुंचा देता है।

धोनी ने खड़गपुर के मैदानों पर ही टीम इंडिया को लीड करने और 20-20 व वनडे जैसे फटाफट क्रिकेट के फॉर्मेट में तुरंत फैसले लेने का गुण सीखा था। खड़गपुर के ग्रीन अकादमी क्लब के सचिव प्रदीप सरकार को आज भी वह दिन याद है जब धोनी मात्र 300 रुपए लेकर मैच खेला करते थे

प्रदीप बताते हैं कि रेलवे ग्राउंड में उनके एकेडमी का डे नाइट टेनिस टूर्नामेंट होता था उस टूर्नामेंट में धोनी हर साल पार्टीसिपेट करते थे। 2003 में भी उन्होंने टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था और अपनी टीम को चैंपियन भी बनाया था।

उन्होंने बताया कि एक बार टाटा टीम के साथ गेम में आखिरी ओवर में 8 रन बचाने के लिए धोनी विकेटकीपिंग छोड़ खुद गेंदबाजी करने पहुंच गए थे। उन्हें उस टूर्नामेंट में मैन ऑफ दे मैच भी मिला था।

धोनी ने अंतरराष्ट्रीय मैचों में पहली या आखिरी बॉल पर छक्का मारने का हुनर इसी मैदान में सीखा।

इसके पीछे का कारण बताते हुए प्रदीप ने कहा कि खड़गपुर ग्राउंड का ऑफ साइड बहुत छोटा मतलब करीब 22 गज का था। इसीलिए इस ग्राउंड पर नियम था कि ऑफ साइड पर बल्लेबाज को छक्का या चौका मारने पर भी सिर्फ दो ही रन मिलेगें। यानी कोई भी खिलाड़ी छक्का व चौका सिर्फ लेग साइड पर ही मार सकता था। इसी लिए धोनी ने इस ग्राउंड पर छक्का और चौका लगाने के लिए हेलीकॉप्टर शॉट इजाद किया जिसने धोनी के क्रिकेट कॅरियर में धूम मचा दी।

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