होमियोपैथी की दवाई कैसे बनायी जाती है, मतलब क्या ये भी किसी अंग्रेजी दवाइयों के तरह केमिकल से बनाई जाती है?

होम्योपैथी में दवाएं कई तरह से बनती हैं। जैसे पेड़-पौधों के औषधीय तत्वों से(वेजिटेबल सोर्स से), गेंदे, चमेली के फूल से तत्व लेकर दवा बनाना। खनिज पदार्थ (मिनरल सोर्स) मिनरल सोर्स कैल्शियम, पोटैशियम की मदद से दवा बनाते हंै

होम्‍योपैथी दवाओं का असर इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज का रोग एक्यूट है या क्रॉनिक. एक्यूट रोगों में यह 5 से 30 मिनट और क्रॉनिक बीमारियों में यह 5 से 7 दिन में असर दिखाती है. जो काम 2 गोली करती है वही चार गोलियां करेंगी. इसलिए ज्यादा या कम दवा लेने से कोई फर्क नहीं पड़ता.

एलोपैथी मेडिसिन के साथ होम्योपैथी मेडिसिन नहीं ली जा सकती ये भी एक मिथक है। बल्कि होम्योपैथी की सबसे खास बात है कि आप डॉक्टरी परामर्श से इसका सेवन किसी भी दूसरे मेडिसिन के साथ कर सकते हैं। इससे किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट होने का खतरा नहीं होता। होम्योपैथी में किसी भी तरह की जांच नहीं की जाती।

होम्योपैथी की दवाओं को दो श्रेणियों अल्कोहल डाइल्यूशन व मदर टिंचर में बांटा जा सकता है। इनमें 90 फीसद तक अल्कोहल होता है। मदर टिंचर दवाएं एक अवधि के बाद जरूर बेअसर हो जाती हैं।

होम्‍योपैथी चिकित्‍सा के जन्‍मदाता सैमुएल हैनीमेन है। यह चिकित्सा के ‘समरूपता के सिंद्धात’ पर आधारित है जिसके अनुसार औषधियाँ उन रोगों से मिलते जुलते रोग दूर कर सकती हैं, जिन्हें वे उत्पन्न कर सकती हैं। औषधि की रोगहर शक्ति जिससे उत्पन्न हो सकने वाले लक्षणों पर निर्भर है।

होम्योपैथिक दवाओं पर एक्सपायरी डेट का प्रावधान बगैर किसी शोध व वैज्ञानिक आधार के किया गया था। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने करीब छह महीने पहले अल्कोहल युक्त (अल्कोहल डाइल्यूशन) दवाओं पर एक्सपायरी डेट लिखने का प्रावधान खत्म कर दिया है। यानी इस श्रेणी की दवाएं खराब नहीं होतीं और उनका लंबे समय तक इस्तेमाल करना सुरक्षित है। वर्ष 2006 में ड्रग एंड कॉस्मेटिक रूल में संशोधन कर होम्योपैथी की दवाओं पर एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य किया गया था। क्योंकि निर्माण के पांच साल बाद ये खराब हो जाती हैं।

एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य

केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. आरके मनचंदा ने बताया कि होम्योपैथी में करीब तीन हजार दवाएं हैं, जिनमें से करीब 350 दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल होता है। होम्योपैथी की दवाओं को दो श्रेणियों अल्कोहल डाइल्यूशन व मदर टिंचर में बांटा जा सकता है। इनमें 90 फीसद तक अल्कोहल होता है। मदर टिंचर दवाएं एक अवधि के बाद जरूर बेअसर हो जाती हैं।

होम्योपैथी में बहुत सारी दवाएं बैक पोटेंसी से बनती हैं। इसका मतलब यह हुआ कि पहले से मौजूद अल्कोहल डाइल्यूशन की पुरानी दवा से नई दवा बना ली जाती है। चूंकि नई दवा भी अल्कोहल डायल्यूशन होती है, इसलिए उसमें भी एक्सपायरी डेट की जरूरत नहीं होती।

होम्योपैथी की दवाओं पर एक्सपायरी डेट का प्रावधान तय होने के पीछे कंपनियों का भी खेल था। ऐसी सोच थी कि एक्सपायरी डेट होने से दवाएं जल्दी खराब मानी जाएंगी तो उनकी बिक्री बढ़ जाएगी पर हुआ उल्टा। इन दवाओं की मांग नहीं बढ़ने से दवाएं फार्मेसी पर ही एक्सपायर होने लगीं।

अंग्रेजी दवाओं में कई तरह के केमिकल प्रयोग होने के कारण वह रोग ठीक तो करती हैं पर कुप्रभाव भी पैदा करती है। इससे एक बीमारी ठीक होती है और दूसरी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इससे बचना है तो होम्योपैथी अपनाएं। इस विधा में अंग्रेजी दवाओं की तुलना में कुछ समय तो लगता है लेकिन रोग का समूल नाश हो जाता है। साथ ही किसी तरह का साइड इफेक्ट भी नहीं होता। यह बात होम्योपैथिक चिकित्सक डा.प्रदीप त्रिवेदी ने जागरण प्रश्न पहर में पाठकों के सवालों का जवाब देते हुए बताई। उन्होंने बताया कि इस विधा में दवा को नियमित रूप से लेना व दवा लेने के पूर्व मुंह का पूरी तरह साफ होना बहुत आवश्यक है। तंबाकू या किसी भी तरह के गुटखा का सेवन करने के तुरंत बाद होम्योपैथ की दवा लेना उतना कारगर नहीं होता।

दो तरह की होती है होम्योपैथिक दवा?

होम्योपैथिक दवा 2 तरह की होती हैं लोअर पोटेंसी और हायर पोटेंसी। लोअर पोटेंसी एक्यूट डिजीज जैसे सर्दी-जुकाम, एलर्जिक डिजीज जैसे अस्थमा, एक्जिमा आदि में दी जाती है। जबकि हायर का स्तर 6 से 1 लाख पोटेंसी तक होता है। इसमें अगर मरीज का स्वभाव बीमारी के साथ बदल रहा हो तो डॉक्टर उसे बदल देते हैं। लोअर पोटेंसी हफ्ते में 4-6 बार और हायर पोटेंसी हफ्ते या 15 दिन में लेनी होती है।

किन लोगों पर होता है ज्यादा असर?

होम्योपैथिक दवा का असर उन लोगों पर ज्यादा होता है जो शराब, गुटका, धूम्रपान का सेवन नहीं करते और हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करते हैं।

चलिए अब हम आपको बताते हैं दवा लेने के कुछ नियम

1. दवा लेने के बाद डिब्बी को कभी भी खुला ना छोड़ें।
2. अब होम्योपैथिक ट्रीटमेंट ले रहे हैं तो नशीली वस्तुओं से दूर रहें, नहीं तो इनका असर नहीं होगा।
3. इन दवाओं को कभी भी हाथ में लेकर नहीं खाना चाहिए। होम्योपैथिक दवाओं को ढक्कन की मदद से मुंह डालना चाहिए।
4. दवा लेने के करीब 10 मिनट तक कुछ भी खाएं-पीएं नहीं। साथ ही ब्रश करने से भी बचें।
5. ध्यान रखें कि होम्योपैथिक खा रहे है तो कॉफी और चाय से दूरी बना लें।
6. होम्योपैथिक गोलियां लेने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप उन्हें जीभ के नीचे रखें या चूसें। कभी भी इन्हें पूरी तरह से न निगलें।
7. होम्योपैथिक दवाएं खा रही हैं तो ध्यान रखें कि अपनी डाइट से खट्टी चीजों को हमेशा के लिए आउट कर दे क्योंकि खट्टी चीजें खाने से दवाइयां अपना असर नहीं दिखा पाती और इलाज अच्छे से नहीं हो पाता।

८. बिना रुके बिना गई किए गोलियां खानी है इछा शक्ति बढ़ानी है आपको धैर्य रखना है शांत रहना है तभी ठीक होगा इसमें लंबा समय लगभग ६ महीना से लेकर ५साल लगता है लेकिन जड़ से खत्म हो जाता है बीमारी,

९. Homeopathy आने से एक फायदा लोगों को ही जरूर पहुंचेगा की 3 4 बीमारी साथ में हो गई है तो आप एक ही गोली से ठीक हो जवोगे अलोफाइथी के साथ ऐसा नहीं होता है होम्योपैथी में ऐसा होता है bimariyo mein English doctor se बीमारियां ठीक करने को बोलते हैं या अलग-अलग डॉक्टर से मिलना पड़ता है एक ही नुकसान है और झुंझुत मारी ज्यादा होती है

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