हज़ारों टन के वजन के साथ जहाज धरती पर लैंड करते हैं, फिर भी टायर नहीं फटता। ऐसा कैसे संभव होता है? जानिए

हम यह बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि आज के समय में पहले की अपेक्षा हर चीज़ में बदलाव हो चुका है। प्रतिदिन कुछ न कुछ नए खोज हो रहें हैं और नई तकनीक विकसित होते जा रहीं हैं। पहले लोगों को दूर की यात्रा में कई दिन लगते थे लेकिन अब कितनी भी ज़्यादा दूरी हो मात्र कुछ ही घण्टे में उसे तय कर सकते हैं। हम प्लेन से कितनी भी लंबी दूरी को बहुत कम समय मे पूरा कर लेतें हैं।

प्लेन से यात्रा करने के दौरान एक बात अक्सर मेरे जहन में आती कि आखिर ऐसी क्या चीज़ हैं इस प्लेन मे जो यह हजारों टन का वज़न लेकर आसानी से लैंड कर जाता है। लैंडिंग के वक्त इसके टायर में कोई प्रॉब्लम नहीं होती। शायद ये सवाल आपके भी मन में आता होगा अगर आप नौकरी, बिजनेस और स्ट्रेस को जमीन पर छोड़कर हवा में यात्रा कर रहें हो।

हम अक्सर अपने आस-पास देखतें हैं कि कार हो या साइकिल इसकी टायर फट जाती है। लेकिन इतनी तीव्र गति से चलने वाली प्लेन की टायर को कभी नहीं सुना होगा यह फटी है। जबकि यह अधिक मात्रा में समान को लेकर लैंड करता है। प्लेन की रफ़्तार लगभग 250 किलोमीटर प्रति घण्टा होती है।

एक टायर सम्भलता है 38 टन वज़न

प्लेन की टायर का निर्माण बहुत ही मजबूती से किया जाता है। इसके एक टायर को लगभग 38 टन वजन संभालने के लिए तैयार किया जाता है। सिर्फ एक टायर की मदद से लगभग 500 बार तक लैंडिंग और टेकऑफ़ हो सकता है।

टायर पर चढ़ाया जाता है ग्रिप

इसके टायर इस लिए मजबूत होतें हैं क्योंकि इस पर ग्रिप चढ़ाया जाता है। जिस कारण यह अधिक बार उपयोग में लाया जा सके। 1 टायर में कम-से-कम 7 बार ग्रिप चढ़ाया जा सकता है। इस हिसाब से एक टायर से 35 सौ बार तक लैंडिंग और टेकऑफ़ हो सकता है। आगे यह किसी उपयोग के लिए नहीं रहता। तब इसे रद्दी में भेजा जाता है।

टायरों में भरी जाती है नाइट्रोजन गैस

इसके टायर में ट्रक के टायर से लगभग 2 गुणा अधुक हवा भरी जाती है। वही कार के अपेक्षा लगभग 6 गुणा। मतलब 200 psi की मात्रा में हवा का प्रेशर दिया जाता है। जितनी अधिक मात्रा में हवा का दबाव होगा टायर भी उतना ही अधिक मजबूत होगा। प्लेन की टायर में नाइट्रोजन गैस रहता है। नाइट्रोजन की वजह से इसके टायर पर तापमान और प्रेशर कम हो पाए।

प्लेन के टायर होते हैं खास

इसके टायर में ग्रूव डिजाइन लगा होता है। जिस कारण प्लेन भींगे हुए रनवे पर बिना दिक्कत के उतर सकें। इसके टायर अरामिड फैब्रिक्स, नायलॉन और सिंथेटिक रबर कंपाउंड्स से निर्मित होते हैं। इसका स्टील और एलुमिनियम के साथ रीइंफ़ोर्स होता है। इन सबका मतलब ये हुआ कि हमारे और जमीन के बीच लगभग 45 इंच तक रबड़ होता है।

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