135 करोड़ की जनसंख्या के बावजूद हम ओलंपिक खेलों में इतना पीछे क्यों हैं? जानिए वजह

जिस उम्र में भारत के खिलाड़ी ओलंपिक में जाना शुरू करते हैं। उस उम्र में तो विदेशी खिलाड़ी मेडल लाने लगते हैं।

विदेशों में स्कूलों, कॉलेजों से ही खेलों में रूचि बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया जाता है और उनकी तैयारी शुरू कराई जाती है। लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। यहां स्कूल-कॉलेजों में खेलों को लेकर उतनी सुविधाएँ नहीं है।”

भारत में खेलों में खराब प्रदर्शन का एक बड़ा कारण यह भी है कि यहां खेल को एक करियर चॉइस के रूप में नहीं देखा जाता। मां-बाप अपने बच्चों को खेलों में डालने में संकोच करते हैं। जो खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके होते हैं उन्हें ही कुछ सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा जो खिलाड़ी ज्यादा शिक्षित नहीं होते वे इससे भी वंचित रह जाते हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों को डर लगता है कि जब वे खेल से अलग हो जाते हैं तो उनके पास काम करने के मौके नहीं होते।

खेलों की ज्यादातर सुविधाएं शहरों में हैं, जिसके कारण गांव के खिलाड़ियों को संघर्ष करना पड़ता है। उन्हें शहर आ आकर प्रशिक्षण लेना पड़ता है जिससे उनके प्रदर्शन पर फर्क पड़ता है। खिलाड़ियों को उनके नजदीक स्टेडियम उपलब्ध कराएं जाएं।

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