3डी प्रिंटिंग तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है? जानिए

3डी प्रिंटिंग एक ऐसी टेक्नोलॉजी है किसमे थ्री डाइमेंशनल ऑब्जेक्ट्स बनाया जाता है। इसे एडीटीव मैन्युफैक्चरिंग भी कहते हैं। इसके बढ़ते उपयोग को देखते हुए लगता है कि आने वाले दिनों में यह तकनीक हमारे लिए काफी उपयोगी होने वाली है, क्योंकि इसका क्षेत्र बढ़ता ही जा रहा है।

अब इस तकनीक के जरिए न केवल मकान बनाए जा रहे हैं बल्कि इंसानी शरीर के कई अंग बनाना भी संभव हो गया है जैसे दांत, कान और हड्डी के पार्ट्स बड़ी आसानी से बनाए जाने लगे हैं। इसके अलावा बहुत से डिज़ाइनर इस तकनीक का इस्तेमाल कर कुर्सी, गहने, जूते आदि बना रहे हैं।

3डी प्रिंटिंग में वक ही प्रोडक्ट के कई लेयर और डिजिटल फ़ाइल का प्रयोग किया जाता है। इसमें मटेरियल को तबतक लगातार एक के ऊपर एक क्रम में लगाया जाता है, जबतक फाइनल प्रोडक्ट 3 डाइमेंशनल फिगर में ना बदल जाये। इस तकनीक में मटेरियल के तौर पर ज्यादातर प्लास्टिक के अलग अलग फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। जरूरत पड़ने पर प्लास्टिक के अलावा रबर, कॉपर और लोहे का उपयोग किया जा सकता है।

जिस वस्तु का 3डी मॉडल कंप्यूटर में बनाना होता है, उसके लिए ब्लेंडर नामक सॉफ्टवेयर काम मे लिया जाता है। कंप्यूटर के ब्लेंडर सॉफ्टवेयर में बनी 3डी फ़ाइल को 3डी प्रिंटर में डाला जाता है। इसके बाद 3डी प्रिंटर प्लास्टिक या बताए गए दूसरे मटेरियल का इस्तेमाल कर उस वस्तु का बिल्कुल समान मॉडल तैयार कर देता है। ब्लेंडर सॉफ्टवेयर की फ़ाइल एडीटीव मैन्युफैक्चरिंग फ़ाइल फॉरमेट में होती है।

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