क्या बिना माला के किसी मंत्र का जाप किया जा सकता है? यदि हाँ तो किस प्रकार? जानिए

जी हां बिना माला के मानसिक जाप किया जा सकता है,जैसे चलते फिरते खाते पीते मन में अपने ईष्ट का नाम या गुरु से प्राप्त मंत्र का सुमिरन ही मानसिक जाप कहलाता हैं। मानसिक जाप किसी भी शुद्धि अशुद्धि सूतक में भी कर सकते है क्यों की मन लगातार कुछ न कुछ व्यर्थ चिंतन करता रहता है इसकी अपेक्षा क्यों न भगवान का चिंतन किया जाए।

उदाहरण: कोई संसारिक चिंता सता रही हो तो तुरंत सावधान हो जाएं और मन से उस विचार को हटाकर मन ही मन बाहर किसी को सुनाई न दे इस प्रकार हे हरी,हे राम या कृष्ण, ॐ नमः शिवाय आदी जो आप को अनुकूल लगे मन में दोहराते जाए।

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