Do you know that Hanuman ji had not one or three marriages, and also had a son

क्या आप जानते है हनुमान जी की एक नहीं तीन शादियाँ हुई थी,और एक पुत्र भी था

आप सभी जानते हैं कि बचपन में जब हनुमानजी छोटे थे तब एक बार सूर्य देव को फल समझ कर खाने के लिए गए लेकिन बड़े होने के बाद हनुमान जी ने उन्ही सूर्यदेव को अपना गुरु मान लिया था और उनसे शिक्षा लेने के लिए उनके पास पहुंच गए क्योंकि हम जानते हैं कि यह दुनिया निरंतर चलती रहती है इसलिए सूर्यदेव कभी भी रुक नहीं सकते थे.

हनुमान जी को उनसे शिक्षा लेने के लिए उनके साथ साथ उड़ना पड़ता था, और इस तरह वह उनसे विद्या सीख रहे थे. सूर्यदेव नो कलाओं के ज्ञानी थे जिनमें से 5 कलाएं सूर्य देव ने हनुमान जी को सिखा दी लेकिन 4 कलाएं ऐसी थी जो सूर्य देव ने हनुमान जी को दिखाने से मना कर दिया.

तब हनुमान जी ने सूर्य देव से बहुत विनती की कि आप मुझे सभी कलाए सिखाईये या फिर मुझे यह बताइए की आप मुझे यह कलाऐ क्यों नहीं सिखाना चाहते. तब सूर्य देव ने कहा कि यह जो बाकि की चार कला हैं वह किसी विवाहित व्यक्ति को ही मैं सिखा सकता हूं क्योंकि तुम बाल ब्रह्मचारी हो इसलिए मैं यह कलाए में तुम्हें नहीं सिखा सकता हु.

तब हनुमान जी ने कहा कि आप मेरे गुरु हैं आप ही इसका कोई उपाय बताएं तब सूर्य देव ने कहा कि हम इसके लिए एक काम कर सकते हैं कि तुम शादी कर लो और फिर मैं तुम्हें सिखा सकता हूं लेकिन हनुमान जी शादी नहीं कर सकते थे क्योंकि उन्होंने बाल ब्रह्मचर्य का प्रण लिया था.

फिर भी उन्हें विद्या सीखना थी इसलिए उन्होंने सोचा कि ठीक है मैं शादी कर लेता हूं सिर्फ विद्या लेने के लिए फिर एक विकत परेशानी आ गई की आखिर शादी किस से की जाए तब सूर्य देव ने कहा कि तुम मेरी बेटी सुवर्चला से शादी कर लो उसने भी एक सन्यासी का जीवन जीने का व्रत ले लिया है और वह जंगल में तपस्या कर रही है.

जब सूर्य देव के कहने पर सूर्य देव की पुत्री और हनुमान जी ने शादी कर ली उसके बाद सूर्यदेव की पुत्री अपने वचन के अनुसार शादी के पश्चात जंगल में तपस्या करने चली गई और हनुमान जी ने सूर्य देव के साथ रहकर बाकी की बची हुई 4 कलाए भी सीख ली.

भारत में आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले में हनुमान जी और उनकी पत्नी सुवर्चला का मंदिर बना हुआ है इस मंदिर में हनुमान जी अपनी पत्नी सुवर्चला के साथ विराजमान है और यह मंदिर एक मात्र सबूत है जहां पर पता चलता है कि हनुमान जी की शादी हुई थी.

हनुमान जी पिता कैसे बने :–

आप जानते हैं कि हनुमान जी पिता कैसे बने हनुमानजी के पिता बनने का सारा उल्लेख वाल्मीकि रामायण में मिलता है वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण की लंका में गए थे और रावण ने उनकी पूंछ में आग लगवा दी थी तब हनुमान जी ने पूरी लंका को जलाकर खाक कर दिया था.

लंका में लगी भीषण आग से चारों और भीषण गर्मी फैल गई थी इस भीषण गर्मी के कारण हनुमान जी अपनी पूंछ को बुझाने के लिए समुद्र में पहुंच जाएं और समुद्र में अपनी पूंछ को बुझाने लगे तब हनुमानजी के शरीर से पसीने की कुछ बूंदे एक मछली के पेट में चली गई जिससे कि वह मछली गर्भवती हो गई.

रावण के भाई अहिरावण के द्वारा उस मछली को पकड़कर पाताल लोक ले जाया गया जब उस मछली का पेट काटा गया तो उसके पेट से एक वानर रूपी बालक निकला और उस बालक को पाताल लोक का द्वारपाल बना दिया गया. अहिरावण जब राम जी और लक्ष्मण जी को पाताल लोक ले गए तब हनुमान जी भी अहिरावण का पीछा करते हुए पाताल लोक पहुंच गए तब वहां हनुमान जी का सामना उस बालक से हुआ जब हनुमान जी ने उस बालक से अपना परिचय पूछा तो उस बालक ने कहा कि मैं पवन पुत्र हनुमान का पुत्र मकरध्वज हूं.

तो इस प्रकार हनुमानजी ब्रह्मचारी भी रहे उनकी शादी भी हुई और उनके एक पुत्र भी हुआ तो आज आप लोगों ने जाना कि हनुमान जी की शादी हुई थी और उनका एक पुत्र भी था. अगली स्टोरी में हनुमान जी की बाकि दो शादियों के बारे में आपको पूरी जानकारी दूंगा.

दोस्तों यह पोस्ट आपको कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं और अगर यह पोस्ट आपको पसंद आई हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर लाइक करना ना भूलें और अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं तो आप हमारे चैनल को फॉलो कर सकते हैं ताकि ऐसी खबरें आप रोजाना पा सके धन्यवाद

Leave a Reply

Your email address will not be published.