वाराणसी के इस गांव में हुई कुत्ते-कुतिया की शादी, गांव वालों ने बताई ये वजह

अंधविश्वास आज से नहीं, सैकडों साल से देश और दुनिया के लिए परेशानियां खड़ा करता रहा है। आज के दौर में भी हमारे देश में लोग अंधविश्वास को फॉलो करते हैं। अंधविश्वास की सभी सीमाओं को तोड़ती हुई एक खबर आई है वाराणसी से।

जी हां, धर्म नगरी वाराणसी से। यहां के एक गांव में अपने परिवार के ग्रह दोषों को दूर करने के लिए लोगों ने एक कुत्ते और कुतिया की शादी कराई है। वो भी पूरे रीति-रिवाजों के साथ।

यूं तो ये गांव वाराणसी में लगता है। लेकिन प्रयागराज यानि इलाहबाद यहां से मात्र 50 किलोमीटर ही दूर है। इस गांव का नाम है कोरांव। उत्तर प्रदेश के दो बड़े शहरों के इतना नज़दीक होने के बावजूद इस गांव के एक परिवार ने अंधविश्वास की हद तोड़ दी। कुत्ते-कुत्ते की इस शादी में बाराती और घराती सभी मौजूद थे। खाने-पीने की व्यवस्था थी। नाच-गाने का इंतज़ाम भी किया गया था।

कुत्ते को किसी दूल्हे की तरह सजाया गया था। मोर मुकुट भी पहनाया गया था। कुत्ते और कुतिया, दोनों के पैरों में महावर लगाया गया था। पंडित भी आया था और उसने मंत्रों के साथ फेरे भी पड़वाए थे। फिर बाद में कुतिया की विदाई भी की गई।

लेकिन ये तो कुछ भी नहीं, हद तो तब हो गई जब हमारे सूत्रों ने देखा कि शादी के लिए बाकायदा निमंत्रण पत्र भी छपवाया गया था। एक आदमी सभी मेहमानों को निमंत्रण पत्र देने के लिए कई दिनों तक रिश्तेदारियों में घूमा भी था। ये सब छोड़िये, गांव के बाकि लोग भी मानते हैं कि ऐसा करने से ग्रह दोष कटता है और मुसीबतों से मुक्ति मिलती है.

जब उस परिवार से बात की गई, जिसने ये शादी कुतिया की तरफ से होस्ट की थी तो उन्होंने कहा कि उनके ये करने से उनके परिवार के लोगों की कुंडली से ग्रह दोष हमेशा के लिए खत्म जाएंगे। और तो और, इन्होंने ये भी कहा कि कुत्ते और कुतिया के जीवन में भी कोई परेशानी नहीं आएगी।

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