इस मंदिर में बकरे की दी जाती है बलि,फिर भी रहता है जिंदा, वजह जान कर हो जाएगे हैरान

बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर अंचल में कैमूर पर्वतश्रेणी की पवरा पहाड़ी पर 608 फीट ऊंचाई पर मां मुंडेश्वरी का एक अनोखा मंदिर है। मां मुंडेश्वरी का यह मंदिर भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में शुमार है. यहां बकरे की बलि तो दी जाती है,

लेकिन उसकी मौत नहीं होती। वैसे तो देवी मां के हर शक्तिपीठ की अपनी एक अलग पहचान है, मगर मां मुंडेश्वरी के मंदिर में कुछ ऐसा घटित होता है जिसपर किसी को सहज ही विश्वास नहीं होता। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंदिर में बकरे की बलि की प्रक्रिया बहुत अनूठी है।

दोस्तों यह भी कहा जाता है की मंदिर में बकरे की बलि नहीं दी जाती है तो यहां बकरे को देवी के सामने लाया जाता है, जिस पर पुरोहित मंत्र वाले चावल छिड़कता है, जिससे वह बेहोश हो जाता है, फिर होश में आने के बाद उसे बाहर छोड़ दिया जाता है.

बकरे की बलि

इस मंदिर को अति प्राचीन इसलिए भी माना जाता है क्योंकि इस मंदिर का निर्माण 108 ईसवी में हुआ था. हालांकि इस मंदिर के निर्माण को लेकर कई और मान्यताएं भी प्रचलित है.

इस मंदिर में लगे भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के सूचनापट्ट से यह जानकारी मिलती है कि यह मंदिर 635 ईसवी से पूर्व अस्तित्व में था.

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