जादुई खरगोश और अनुज की हिंदी मजेदार कहानी

एक अनुज नाम का लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। अनुज बहुत निर्दई था। वह किसी भी छोटे जानवर को पकड़कर कैद कर लेता था। एक दिन अपने घर के आसपास घूमते घूमते उसे एक सुंदर चिड़िया दिखाई देती है। अनुज चिड़िया को पकड़ने के लिए उसकी तरफ बढ़ता है।उसे आता देख चिड़िया उड़ जाती है और कहती है तुम चाहे जितना भी जानवरों को पकड़ने में कुशल हो लेकिन मुझे नहीं पकड़ सकते यह सुनकर अनुज काफी देर प्रयास करके चिड़िया को पकड़ लेता है। तब चिड़िया उससे विनती करने लगती है कि मुझे छोड़ दो मेरे घरवाले मेरा इंतजार कर रहे होंगे। पर अनुज को उस पर दया नहीं आती वह उसे घर ले जाकर पिंजरे में बंद कर देता है । और कुछ दिन बाद अनुज और उसके दादाजी उसे मारकर खा जाते हैं। फिर अगली सुबह दादाजी और अनुज जंगल में घूमने जाते हैं। तब वहां अनुज को एक सुंदर खरगोश दिखाई देता है। उसे देखकर उसकी तरफ पकड़ने के लिए पड़ता है। तभी पेड़ पर बैठा उल्लू कहता है उसे पकड़ने की कोशिश मत करो उसे जादुई मंत्र आते हैं।

पर अनुज नहीं सुनता वह खरगोश को जाकर पकड़ लेता है। तभी वहां काफी तेज प्रकाश निकलता है और जब प्रकाश खत्म होता है तब खरगोश बहुत बड़ा हो गया होता है और अनुज को अपने हाथों में पकड़ लेता है। अनुज खुद को खरगोश के हाथों में देख कर खूब प्रयास करता है छुड़ाने का पर सारे प्रयास असफल रहते हैं।कुछ देर बाद खरगोश दादा जी को भी एक हाथ में पकड़ लेता है। अनुज कहता है मैं जानवरों को पकड़ता था दादाजी बेकसूर है उन्हें छोड़ दो तब खरगोश कहता है। यह भी उन्हें मारकर खाने में तुम्हारा साथ देते थे। अनुज और उसके दादाजी बहुत करते हैं पर खरगोश उन्हें नहीं छोड़ता और अपनी जादुई दुनिया में ले जाता है। वहां पर उस खरगोश से भी बड़े-बड़े खरगोश रहते हैं वहां पर अनुज और दादा जी को एक बड़े पिजड़े में खरगोश बंद कर देते हैं। और उन्हें खाना पीना कुछ नहीं देते हैं जब तक कि वह मर नहीं जाते। कुछ दिन बाद दादाजी और अनुज दोनों वहीं पर मर जाते हैं।तो दोस्तों आप जैसा कर्म करते हैं आपको वैसे ही फल मिलते हैं।

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