आंखो में होने वाले कुछ रोगों के बारे में आप भी जानना चाहते हैं तो यह पोस्ट आपके लिए।

1- आंखो का तिरछा होना – बच्चों की दोनो आंखो की दृष्टि में अंतर होने पर उन्हें प्रत्येक वस्तु देखने के लिए आंखो को इधर – उधर घुमा कर परिश्रम पूर्वक देखना पड़ता है। निरंतर परिश्रम के कारण आंख की कोई पेशी खिच जाती है तो कोई सिकुड़ जाती है। यह दोष अधिकतम 3-4 की आयु के बच्चों में उत्पन्न होता देखा गया है। प्राय: ऑपरेशन द्वारा दोष ठीक हो जाता है।

2- आंख दुखना – यह संक्रामक रोग है। रोग के कीटाणुओं का संक्रमण वायु, कपड़ों एवं हाथ द्वारा हो सकता है। इसमें पलके सूज जाती हैं। तथा आंखो से कीचड़ निकलने लगती है। रोग बढ़ने पर आंख का खुलना भी कठिन हो जाता है। साधारण उपचार द्वारा इस रोग से मुक्ति पाई जाती है।

3- गुहेरी – पलकों की वसा ग्रंथियों में सूजन आ जाने से आंख में एक छोटी फुंसी निकल आती है। आंखो में गंदे हाथ लगाने, उन्हें बार बार मिलने या पेट की खराबी से यह रोग उत्पन्न होता है। इसके लिए चिकित्सक के परामर्श से उचित उपचार कराना चाहिए।

4- मोतियाबिंद – इसमें रेटीना पर एक आवरण छा जाने से रोगी को कुछ भी साफ दिखाई नहीं पड़ता है। इसके लिए ऑपरेशन करा कर रोगमुक्त हुआ जा सकता है।

5- रोहे – इस रोग में पलकों आंतरिक दीवार पर छोटे – छोटे दाने हो जाते हैं जो आंख को कष्ट देते हैं। इस रोग में आंख को बोरिक अम्ल से धोना चाहिए। तथा नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

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