जानिए विटामिन k की कमी को कैसे रोका जा सकता है?

विटामिन K शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक पोषक तत्वों में से एक होता है। अगर शरीर में सामान्य मात्रा में इसकी आपूर्ति ना हो पाए तो कई प्रकार की समस्याएं होने लगती हैं, जैसे खून के थक्के ना बनने के कारण चोट या घाव से बहता खून ना रुकना आदि। शरीर में विटामिन K की मात्रा की आवश्यकता पुरुष, महिला, गर्भावस्था और अन्य स्थितियों में अलग, अलग हो सकती है।

डॉक्टर आपके लक्षणों व पिछली मेडिकल जानकारियों की मदद से विटामिन के में कमी की समस्या की जांच कर लेते हैं और आपमें खून जमने (Coagulation of blood) की प्रक्रिया की जांच करने के लिए ब्लड टेस्ट करवाने का आदेश भी दे सकते हैं। इस विटामिन की कमी का इलाज करने के लिए अापके डॉक्टर आपको सप्लीमेंट्स दे सकते हैं जो प्राकृतिक भी हो सकते हैं और कृत्रिम भी हो सकते हैं।

विटामिन K की कमी के बचाव के उपाय –
न्यूट्रीशनिस्टों का मानना है कि आम तौर पर पुरुषों को 120 मिलीग्राम विटामिन k और महिलाओं के लिए 90 मिलीग्राम विटामिन k पर्याप्त होता है। हरी पत्तेदार सब्जियों सहित कुछ खाद्य पदार्थ हैं जिसमें विटामिन k की मात्रा काफी अधिक होती है, इन्हें थोड़ा सा भी खा लेने से आपको पर्याप्त मात्रा में विटामिन मिल जाता है।

जन्म के दौरान विटामिन k का एक टीका नवजात शिशुओं में यह समस्या होने से रोकथाम कर सकता है। जिन लोगों को वसा कुअवशोषण से जुड़ी समस्याएं हैं उनको विटामिन k के सप्लीमेंट्स लेने के बारे में और अपना विटामिन k के स्तर की जांच करवाने के लिए डॉक्टर से बात करनी चाहिए। यही प्रक्रिया उन लोगों के लिए भी है जो वारफैरीन और इसी तरह की एंटीकोग्युलेंट दवाएं लेते हैं।

विटामिन K की कमी का उपचार –

विटामिन K की कमी को पूरा करने के लघुकालिक उपचारों में खाने के लिए सप्लीमेंट्स लेना और इंजेक्शन लेना शामिल है। जिन लोगों को कोई अंतर्निहित बड़ी और पुरानी दिक्कत होती है, उन्हें लंबे समय के लिए या आजीवन ये सप्लीमेंट्स खाने के लिए कहा जाता है।

हालांकि भोज्य पदार्थों से प्रचुर मात्रा में विटामिन K प्राप्त किया जा सकता है लेकिन, इसे सप्लीमेंट के रूप में भी लिया जा सकता है। बाजार में आसानी से इसकी गोलियां उपलब्ध है। इन गोलियों को कुछ अन्य पोषक तत्वों जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन डी के साथ मिलाकर दिया जाता है। विटामिन K कई सारी मल्टीविटामिन दवाईयों में भी मौजूद रहता है।

पीटी ब्लड टेस्ट (एक एेसा ब्लड टेस्ट, जिसमें खून निकालने के बाद यह देखा जाता है कि उसका बहना कितनी देर में रुकता है, और रुकने तक कितना खून बह जाता है) में अगर यह सामने आता है कि खून बहुत देर तक बहता है तो आम तौर पर विटामिन K इंजेक्शन के रुप में दिया जाता है। अगर खून बहना रुक जाता है और रक्त के प्लाज्मा में मौजूद प्रोटीन जमने लगता है (खून का थक्का जमना) तो माना जाता है कि विटामिन K की कमी ही रक्तस्त्राव की वजह रही। हालांकि इलाज लेने के बाद उसका असर दिखने में कम से कम 2 से लेकर 5 दिन तक का समय लग जाता है।

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