मुलेठी के बारे में और उसके फायदे जानिए घर बैठे

इसका क्षुप अरब, फारस की खाड़ी, अफगानिस्तान, तुर्किस्तान एवं साइबेरिया आदि स्थानों में उत्पन्न होता है। इसकी उपज पंजाब से लेकर पेशावर आदि हिमालय के निचले हिस्से में तथा अंडमान द्वीप एवं म्यानमार में होती है। बलूचिस्तान तथा चित्राल में भी यह उत्पन्न होता है। कश्मीर में बरमल्ला घाटी में तथा अन्य अनेक स्थानों पर इसको उत्पन्न करने में सफलता प्राप्त हुई है।

इसका क्षुप 5-10 मीटर ऊँचा होता है। पत्रक-छोटे, 4 से 7 जोड़े, आयताकार से चौड़ाई लिए हुवे भालाकार, अपरिमित सदण्डिक पुष्प व्यूह; पुष्प- बैंगनी वर्ण के; फली-छोटी, बारीक, चिपटी; बीज- बहुत या 2-3 होते है। इसकी जड़ तथा भौमिक तने को सुखाकर छाल सहित अथवा छाल निकालकर बाजार में मुलेठी के नाम से बेचा जाता है। ये लम्बे टुकड़े, पीताभ बादामी रंग के झारीदार होते है तथा छाल निकाले हुए हल्के पीले रंग के रेशेदार होते हैं। इनमें एक प्रकार की हल्की गन्ध तथा स्वाद मीठा होता है।

गुण और प्रयोग – मुलेठी मधुर, शीतल, स्नेहन, बल्य, वृष्य, रसायन, कफशामक, स्वर्य, नेत्र्य, मूत्रजनन, स्तन्यवर्धक, शोथहर एवं व्रणरोपक गुणों से युक्त होती है।
इसमें स्नेहन तथा सौम्य कफ नि:सारक गुण होने के कारण इसका मुख्य उपयोग स्वरभंग, कास, नासिका शोथ एवं गलशोथ आदि में किया जाता है। इसके लिए इसके टुकड़े को मुख में रख कर चूसने को दिया जाता है तथा तीसी के साथ इसके क्वाथ का उपयोग किया जाता है।
मीठी होने के कारण क्वाथों को मधुर बनाने के लिये तथा अनेक औषधियाँ जैसे एलवा आदि को सुस्वादु बनाने के लिये तथा खाँसी के लिये चूसने की गोलियों में इसका उपयोग करते हैं। इसके चूर्ण का उपयोग गोली बनाने में सहायक द्रव्य के रूप में व्यवहार में आता है।
मूत्रमार्ग के प्रक्षोभ में यह बहुत उपयोगी है। इससे पेशाब की जलन दूर होती है।

अम्लपित्त में इसके उपयोग से आमाशयिक अम्ल कम होकर शूल दूर होता है।
चीन में इसका व्यवहार रसायन औषधि की दृष्टि से बहुत किया जाता रहा है तथा अपने यहाँ भी इसे रसायन, बल्य तथा शुक्रल मानते है।
इसका सत्त्व काले रंग का तथा मीठा होता है, मुलेठी का व्यवहार खाँसी एवं गले की तकलीफ आदि में चूसने के लिए किया जाता है।
इसका उपयोग क्षतक्षीण, रक्तवमन, हृदय रोग एवं अपस्मार आदि में भी किया जाता है। दूध अथवा घृत और मधु के साथ इसको देना चाहिये।
घृत के साथ इसके कल्क का प्रयोग घावों पर लगाने के लिये उपयोगी है। भिलावे से यदि त्वचा में सूजन हो गई हो तो मुलेठी और तिल को दूध में पीसकर लेप करने से लाभ होता है।

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