जानिए नींद की दिक्कत के लिए आप भी लेते है स्लीपिंग पिल्स, तो जरूर पढ़ें यह खबर

सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने नींद न आने की बीमारी को पब्लिक हेल्थ प्रॉब्लम कहा है। जो कि एक गंभीर समस्या है। ऐसे बहुत से लोग हैं जो इंसोम्निया जैसे स्लीप डिसऑर्डर से ग्रस्त हैं। क्रोनिक इंसोम्निया के उपचार के लिए कुछ लोग कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी का सहारा लेते हैं। हालांकि, दवाएं भी कुछ लोगों के लिए अनिद्रा में मददगार होती हैं।

जब भी डॉक्टर आपको दवा दे रहे हों, सुनिश्चित करें कि उन्हें आपकी सारी मेडिकल कंडीशंस के बारे में पता हो। साथ ही अगर आप अन्य दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वह भी डॉक्टर को बताएं। खासतौर पर अगर उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) या लिवर की समस्या है, तो अपने चिकित्सक को जरूर बताएं।

स्लीपिंग पिल्स लेने के दौरान कैफीन और एल्कोहॉल के सेवन से बचना चाहिए। इसके लिए चाय और कॉफी इन्टेक को सीमित कर देना चाहिए।

स्लीपिंग पिल्स की पहली खुराक ऐसे समय रात में लें जिसमें अगली सुबह कहीं जाना भी न पड़े।

नींद की गोलियां दो तरह की होती हैं एक दिमाग में नींद को प्रमोट करने वाले रिसेप्टर को टारगेट करके नींद लाने में मदद करती हैं लेकिन, इसकी आपको लत लग जाती है। जबकि न्यू जेनरेशन स्लीपिंग पिल्स पहले वाली की तुलना में ज्यादा असरदार होती हैं। हालांकि, इनके दुष्प्रभाव भी होते हैं।

अचानक से नींद की गोलियां लेना बंद करना नुकसानदायक हो सकता है। इससे इंसोम्निया की समस्या वापस लौटकर आ सकती है। इसकी खुराक बंद करने से पहले धीरे-धीरे कम की जाती है।

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