जानिए इस्लाम धर्म के बारे में यह 5 बातें आपको चौका देंगी

  1. पर्दा करना –

दोस्तों जैसा कि हम सब ने देखा है इस्लाम धर्म में नकाब पहनने और पर्दा करने में बहुत ज्यादा तवज्जो दी गई है जो हमने इसकी गहराई से पड़ताल की तो हमें पता चला कि इसके पीछे बहुत ही सच्ची बात छुपी हुई है जैसा कि हमारी संस्कृति बीच यही सिखाती है ठीक उसी तरह इस्लाम में भी पर्दा करना जैसी चीजों पर जोड़ दिया गया है जो कि एक तरह से काफी अच्छी बात है।

  1. भाईचारा फैलाना-

जैसा कि हम सब देखते हैं पिछले कुछ वर्षों में इस्लाम धर्म को आतंक से बिल्कुल जोड़ दिया गया है परंतु यदि आप इस्लाम धर्म की किताबों को उठाकर देखें तो इस्लाम ने हमेशा भाईचारा और प्रेम का संदेश ही दिया है और आतंक फैलाने जैसी चीजों में सख्त मनाही की है। जी हां यह बिल्कुल है कि इस आतंकवाद से किसी भी धर्म का कोई भी व्यक्ति प्रेरित तो हो सकता है परंतु कोई भी धर्म आतंक फैलाना कतई नहीं सिखाता है। और तू और जब हमने इसका अध्ययन किया तो पता चला इस्लाम यह आदेश देता है कि अपने पड़ोसी को कभी भी धोखा नहीं सोने दो उसकी हर संभव मदद करो। जो धर्म अपने पड़ोसी की देखभाल करने उसकी मदद करने का हुक्म देता है वह भला आतंक फैलाने जैसी घिनौनी चीजों के प्रति कभी प्रेरित नहीं कर सकता।

  1. जकात देना-

इस्लाम यह सब आदेश देता है की एक निश्चित आय वर्ग के लोग अपने से गरीब लोगों को जकात दें और उनकी मदद करें आपको बता दें रकात कुछ पैसों की मदद करना जकात कहलाता है।

  1. कुर्बानी करना-

जैसा कि हम सब जानते हैं बकरीद के पर्व पर कुर्बानी की जाती है और कुर्बानी के प्रति कई सारी मनगढ़ंत बातें भी फैलाई जाती है परंतु क्या आपको मालूम है कुर्बानी के प्रति एक बेहद अच्छी विचारधारा जुड़ी हुई है इस्लाम धर्म मैं कुर्बानी करने का हुक्म इसलिए है क्योंकि जिन लोगों के पास पैसा नहीं है यानी कि जो लोग गरीब तबके की हैं उन्हें कुर्बानी का मांस दिया जाए। जिससे गरीब लोग भी पेट भर सके इस्लाम के धार्मिक ग्रंथों में लिखा है कि तुम्हारा कुर्बानी का गोश्त या फिर खून अल्लाह के पास नहीं पहुंचता परंतु उसके पीछे की अच्छी मंशा और परहेज गारी अल्लाह के पास पहुंचती है।

  1. बेटी बचाने की पहल-

दोस्तों क्या आपको पता है इस्लाम धर्म के उदय से पहले जो सभ्यता चलती थी उसमें नवजात बच्चियों को जिंदा दफना दिया जाता था और बेटियों को शराब की तरह देखा जाता था परंतु जब मोहम्मद साहब ने इस परंपरा के खिलाफ आवाज बुलंद की तब वह अकेले ही निकले थे परंतु उनके साथ में लोग जुड़ते गए और आखिरकार इस परंपरा को बंद किया गया तब मोहम्मद साहब ने बताया की बेटियां अल्लाह की दी हुई बेहतरीन नेमतों में से एक हैं। इस तरह कहां जाता है कि बेटियों को न्याय दिलाने और बेटी बचाने की सर्वप्रथम पहल मोहम्मद साहब और इस्लाम ने की थी।

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