जानिए कोरोना के पेशेंट को क्यों पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरत

कोरना इंफेक्शन के दौरान वेंटिलेटर की जरूरत बहुत ज्यादा होती है। सांस लेने में दिक्कत के कारण वेंटिलेटर की जरूरत सभी पेशेंट को पड़ती है। कोरोना के दौरान वेंटिलेटर्स की जरूरत को देखते हुए अधिक मात्रा में वेंटिलेटर्स बनाने की बात सामने आई है। इसके साथ ही मेडिकल उपकरणों की कमी को भी पूरा किया जा रहा है।

कोरोना वायरस के गंभीर मामलों को देखते हुए वेंटिलेटर की जरूरत से इंकार नहीं किया जा सकता है। हो सकता है कि आपने कई बार वेंटिलेटर्स का नाम तो सुना होगा, लेकिन इसे बारे में अधिक जानकारी नहीं होगी। कोरोना इंफेक्शन के दौरान वेंटिलेटर के यूज के बिना मरीज को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

दुनिया की बड़ी कार कंपनी जनरल मोटर्स ने वेंटिलेटर बनाना शुरू किया है। वहीं, भारत में महिंद्रा, मारुति, रिलायंस जैसी कंपनियां वेंटिलेटर का उत्पादन कर रही हैं। अभी तक देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या एक हजार से कम है, लेकिन यदि वायरस समाज में फैलता है तो बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर्स की आवश्यकता हो सकती है।

अभी भारत दूसरे स्टेज में है यानी विदेश से लौटे लोग और उनके संपर्क में आए लोगों तक सीमित है। लेकिन भारत स्टेज 3 की तैयारी में जुटा है, स्टेज 3 का मतलब है कि वायरस समाज में फैल जाए। कोरोना से पहले वेंटिलेटर्स की अधिक मांग नहीं थी तो उत्पादन भी कम होता था। अब अचानक इनकी मांग बहुत बढ़ गई है। ऐसे में कार कंपनियां भी अपने संसाधनों का इस्तेमाल वेंटिलेटर उत्पादन में ही कर रही हैं।

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