जानिए लड़के की डिलीवरी में क्यों होता है ज्यादा दर्द?

यह रिचर्स अपनी प्रकार की पहली रिसर्च है। इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य ये पता लगाना था कि क्या लड़के की डिलिवरी के दौरान लड़की के कंपेरिजन में अधिक दर्द होता है। शोधकर्ताओं ने इसके लिए प्रेग्नेंट महिलाओं को चुना। उनमें से 27 महिलाओं ने लड़के को और 29 महिलाओं ने लड़कियों को जन्म दिया। चाइल्ड बर्थ के बाद सभी महिलाओं के बायोमॉलीक्यूल को चेक किया गया। जांच में पाया गया कि जिन महिलाओं ने लड़के को जन्म दिया था उनके बायोमॉलीक्यूम में अधिक डैमेज था, जबकि जिन महिलाओं ने लड़कियों को जन्म दिया था, उनके बायोमॉलीक्यूम में कम डैमेज पाया गया। इसी के आधार पर ये बात सामने आई कि लड़के की डिलिवरी में ज्यादा पेनफुल होती है।

लड़के की डिलिवरी ड्यू डेट से पहले हो जाती है। इस कारण से डिलिवरी के दौरान कॉम्प्लिकेशन की समस्या होती है।
लड़के की डिलिवरी ज्यादातर मामलों में प्रीटर्म होती है। गर्भावस्था के 20 वें और 24 वें सप्ताह के बीच जन्म लेने की संभावना लड़कों में 27 प्रतिशत अधिक होती है।
गर्भावस्था के 30वें और 33वें सप्ताह के बीच लड़के की डिलिवरी की संभावना 24 प्रतिशत अधिक होती है

गर्भावस्था के 34 वें और 36 वें सप्ताह के बीच लड़के की डिलिवरी की संभावना 17 प्रतिशत अधिक रहती हैं।

स्टडी के दौरान ये बात भी सामने आई है कि लड़के की डिलिवरी के समय सी-सेक्शन के 6 प्रतिशत चांस होते हैं। वहीं 8 प्रतिशत फॉरसेप्स डिलिवरी और 15 प्रतिशत वैक्यूम डिलिवरी के चांसेस रहते हैं।

डॉ. इओगन ने इस बारे में कहा कि लड़की के जन्म के बजाय लड़के की डिलिवरी अधिक समस्या खड़ी कर सकती है। महिलाओं को लेबर में यदि अधिक समस्या हो रही है तो ये अंदाजा लगया जा सकता है कि महिला लड़के को जन्म दे रही है।

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