117 साल बाद महाशिवरात्रि पर बन रहा है ये दुर्लभ संयोग

देवों के देव महादेव का नाम लेने से मंगल की दशा सुधरती है. ज्योतिर्विदों की मानें तो कुंडली में मंगल की खराब दशा इंसान का सुकून छीन सकती है और जरा -जरा सी बात पर विवाद बढ़ने लगता है.

शिवरात्रि के दिन शनि स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। यह एक दुर्लभ योग है। इस योग में भगवान शिव की आराधना करने से शनि, गुरु, शुक्र के दोषों से मुक्ति मिलती है। किसी भी नये कार्य की शुरुआत करने के लिये यह खास योग माना जाता है। 21 फरवरी को बुध और सूर्य कुंभ राशि में एक साथ रहेंगे।

ज्योतिष गणना के मुताबिक फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनायी जाती है। 21 फरवरी को संध्या 5.24 बजे से चतुर्दशी प्रवेश कर जायेगा। शिवरात्रि को कई श्रद्धालु निर्जला व्रत रख रात्रि जागरण करते हैं। ऐसा करने से श्रद्धालुओं को शिवलोक की प्राप्ति होती है। कई मंदिरों में इस दिन शिव-पार्वती का मिलन के साथ श्रद्धालु शिवलिंग पर मोर चढ़ाकर विवाह संपन्न कराते हैं।

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