जब जीवन साथी नो तोड़ दिए एक फौजी के हसीन सपने एक बार जरूर पढ़े

जिंदगी में कई दफा ऐसे मुकाम आते हैं जब लगता है कि वक्त हाथ से फिसल रहा है और किस्मत साथ नहीं दे रही है। जीवन में की गई हर कोशिश हाथ से ऐसे निकलती जाती है जैसे मानों मुट्ठी से रेत। अकसर ऐसी असफलता और निराशा भरा दौर हर किसी के जीवन में आता है। खासकर उन लोगों के जीवन में जो कुछ कर दिखाना चाहते हैं या अपने दम पर नई इबारत लिखना चाहते हैं। लेकिन आज हम ऐसे योद्धा की कहानी आपको बता रहे हैं जिसने जीवन के हर मोड़ पर असफलता, निराश को हराया। यहां तक की मौत को मात देकर सफलता को अपने कदमों में लगाकर खड़ा कर दिया। कहानी सही है या नहीं लेकिन हर उस व्यक्ति को प्रेरणा दे सकती है जो जीवन में संघर्ष के मोड़ पर है। यह कहानी बताती है कि मां और परिवार का रिस्ता क्यों जरूरी है…

मल्टी नेशनल कंपनी को छोड़ फौज को चुना

कहानी गांव में पल-बड़े और हसीन सपने देखने वाले नौजवान की है, जिसने शुरूआत से सिर्फ यह सपना देखा कि बड़ा होकर कुछ कर गुजरना है। 12वीं के बाद ग्रेजुएशन में अच्छे अंकों से स्नातक किया और फिर आईआईएम में दाखिला पा लिया वो भी बिना किसी डोनेशन के। ऊपर से सरकार से स्कालरशिप लेकर मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी कर ली। इस बीच परिवार वालों से सपना देखा कि उनका बेटा अब बड़ी मल्टी नेशनल कंपनी में जाएगा।

विदेश में नौकरी करेगा और गांव में अलीशान कोठी बनवाएगा, लेकिन परिवार वालों को उस वक्त धक्का लगा जब उन्हें पता चला कि उनके लाड़ले ने आर्मी ऑफिसर की परीक्षा पास कर ली है। परिवार के लोग दुखी भी थी लेकिन इस बात से खुश भी की उनका बेेटा देश की सेवा के लिए फौज का अधिकारी बनने जा रहा। ट्रेनिंग पूरी की तो परिवार वालों ने पहली पोस्टिंग के साथ उसके लिए लड़की देखनी शुरू कर दी। छुट्टी पर आए तो उसकी मां ने 10-12 लड़कियों के फोटो दिखाए और पूछा बेटा बता तुझे कौन सी लड़की पसंद है। उसने कहा कि मां मुझे अभी कुछ साल शादी नहीं करनी है, आप अभी परेशान न हो। खैर परिवार वाले मान गए लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका लाड़ला अपना मुकाम तय कर बैठा है। यानी वो यह तय कर चुका है कि उसे किससे शादी करने है। छुट्टी से लौटा तो उसने अपनी आईआईएम की दोस्त से शादी कर ली। अगले साल फिर छुट्टी पर आया तो साथ में गांव अपनी पत्नी को लेकर पहुंच गया। मां ने पूछा बेटा कौन है ये, तो बेटे ने कहा मां मैंने तेरी तमन्ना पूरी कर दी। अब तुझे फोटो दिखाने या कहीं लड़की देखने की जरूरत नहीं है।

यही वो है जो तुम मेरे लिए खोजना रही थीं। साथ में खड़े पिता और बड़े भाई समझ गए कि लड़की कोई और नहीं है बल्कि उसकी पत्नी है। पिता और भाई यह सुनकर नाराज हो गए। यहां तक कह दिया कि अगर कैप्टिन साहब यही करना था तो यहां आने की क्या जरूरत थी। हमें दुनियादारी की नजरों में बेइज्जत कराने का आपने सही रास्ता चुना है। अच्छा होगा कि आप यहां से चले जाएं। मां ने समझाया कोई नहीं उम्र छोटी है और गलतियां हो जाती है। गांव रिश्तेदारी में बता देंगे कि लड़की हमारी ही जाति की है और इनकी दुबारा से शादी करा देंगे। एक फंक्शन भी आयोजित करा लेंगे। मां के इतने कहने पर पत्नी के साथ खड़े बेटे ने कहा मां मुझे दिखावा पसंद नहीं है। अगर मैंने इससे शादी की है तो सब से बताने में क्या दिक्कत है। साथ में खड़े भाई ने कहा कि हां हमें दिक्कत है। हमें तमाशा दिखाने की आत नहीं है। इतना सुनकर पत्नी कहती है कि अगर आपके परिवार इतना अशिक्षित हैं तो मुझे यहां रहना मंजूर नहीं है। फौजी पत्नी के साथ वापस ड्यूटी पर लौट जाता है।

पत्नी ने छोड़ा परिवार ने थामा हाथ

छुट्टी से लौटे कैप्टन को एक ऑपरेशन पर भेज दिया जाता है। जहां पर वो बुरी तरह से घायल हो जाता है। उस घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। छह महीने तक कोमा में रहने के बाद बाहर निकलता है तो देखता है कि उसकी पत्नी सामने खड़ी थी। आपरेशन में एक हाथ और एक पैर गवान के बाद भी वो सोचता है कि कुदरत ने उसके साथ अच्छा किया। उसके जीवन की सबसे बड़ी कमाई उसके साथ है। पत्नी हाल-चाल पूछती है और कुछ देर के बाद कहती है कि मुझे आप से तलाक चाहिए। मेडिकल बेड पर भर्ती नौजवान यह सुनकर दंग रह जाता है। दबी आवाज से पूछा है कि ऐसा क्यों, पत्नी जवाब देती है कि अब आपके साथ मेरा कैरियर बर्बाद है। मेरे जो सपने हैं वो आपके साथ इस हालत में तो कभी पूरे नहीं कर पाऊंगी। पति कहता है कि मैंने आपके लिए आपने परिवार को छोड़ दिया और आप कैरियर की बात कर रही हैं।

पत्नी बेड़ से खड़ी होती है और कहती है कि मेरा और आपका बस यहीं तक का साथ था। इतना कहकर हाथ में तलाक के कागज थमा देती है और कहती है कि मैंने अपनी तरफ से साइन कर दिए हैं आप भी इन पर साइन करके मेरे घर भिजवा देना। इतना कहकर पत्नी अस्पताल के कमरे से बाहर निकल जाती है। चंद सेकेंडे के बाद मां, भाई और पिता उसके रूम में आते हैं। बिस्तर पर लेटा नौजवान कहता है कि कुदरत ने बचा दिया, लेकिन मैंने सपनों को बर्बाद कर दिया। आपकी कोई बात नहीं मानी।

इतना कहते हए उसकी आंखे नम हो जाती हैं। सामने खड़ी मां कहते है कि बेटा मेरे लिए तुझसे बड़ा कोई नहीं। उसके लिए सौ सपने भी बर्बाद होते हैं तो होने दो। एक ने साथ छोड़ा है तो दूसरा हाथ पकड़ लगेगा। वो इतना सुनकर समझ जाता है कि मां को पता है कि उसकी पत्नी तलाक मांग रही है। बराबर में खड़े पिता कहते हैं कि बेटा अबकी बार तो मैं भी तेरी शादी में पगड़ी बाधुंगा। इतना कहकर चारों लोग गले से लिप्ट जाते हैं।

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