लोहरी क्यों मनाई जाती है? इसके पीछे क्या कहानी और महत्व है? जानिए

लोहड़ी पंजाब का एक प्रसिद्ध त्यौहार है, जो 13 जनवरी को मनाया जाता है। यह मकर संक्रांति के 1 दिन पहले मनाया जाता है। इसे ऋतु बदलने का संकेत भी माना जाता है। उसके बाद बसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है। लोहड़ी शब्द “लोही ”से बना है जिसका अर्थ है:वर्षा या फसल का फूटना। लोहड़ी के दिन अमूमन वर्षा होती है।

यह माना जाता है अगर इस दिन बूंदाबांदी ना हो तो फसलों का नुकसान होता है। पंजाब में लोहड़ी फसल की बुवाई से संबंधित है। इस दिन किसान अपने खेत में से कुछ फसल आकर अग्नि को समर्पित करके आभार प्रकट करते हैं। लोहड़ी के एक अन्य अर्थ के अनुसार लोहड़ी 3 शब्दों के सुमेल से बनी है। ल+ओह+ऐड़ी।

` ल’ यानी आग या लकड़ी ‘ओह `यानी उपले, और` डी ` का अर्थ रेवड़ी है। इन तीनों का मिश्रण लोहड़ी का त्यौहार है। लोहड़ी के पीछे बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं पंजाब में दुल्ला भट्टी की कथा बहुत प्रसिद्ध है। जो लोहड़ी पर गाई जाती है। इस प्रसिद्ध कथा के अनुसार बादशाह अकबर के शासन में दुल्ला भट्टी नाम का एक वीर डाकू था, जो अमीरों का धन लूट पर गरीबों में बांटता था।

उस समय मुगलों के अत्याचार से हिंदू लड़कियों को मुक्त करवाता था और उनकी लड़कियों की शादी भी करवाता था। दुल्ला भट्टी का पूरा नाम अब्दुल्ला भट्टी अलमारूफ था। उसकी कब्र लाहौर में है। 

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