आज है राशन कार्ड को आधार से जोड़ने की अंतिम समय सीमा

सितंबर के अंत से खाद्य मंत्रालय को राशन कार्ड में विस्तारित किया। यद्यपि वह आधार से जुड़ा हुआ है, लाभार्थियों ने कार्ड पर अपनी हिस्सेदारी राशन किया है। मंत्रालय ने राशन कार्ड से संबंधित समाचारों के आधार पर एक स्पष्टीकरण जारी किया है। आधिकारिक बयान के मुताबिक, सभी राज्य सरकारों और संघीय करों से राशन कार्ड को राशन कार्ड से जोड़ने की जिम्मेदारी नकली और सार्वजनिक वितरण की अधिसूचना पर आधारित है। इस अधिसूचना को समय-समय पर संशोधित किया गया है।

अब इस काम की समयरेखा 30 सितंबर 2020 तक बढ़ी है। इस बयान के अनुसार, सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्पष्ट निर्देश जारी नहीं करते हैं, कोई भी सही लाभार्थी को अपना हिस्सा देने से इनकार नहीं किया जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि कोई भी राशन कार्ड बेस नंबर रद्द नहीं किया जाएगा क्योंकि मंत्रालय कनेक्ट नहीं था। 20 राज्यों में, योजना केंद्र 20 राज्यों और 20 राज्यों और 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्रीय भूमि में 20 राज्यों और केंद्रीय क्षेत्रों में 20 राज्यों और केंद्रीय क्षेत्रों को चलाने की तैयारी कर रहा है। इस जानकारी ने हाल ही में केंद्रीय मंत्री रामविलास पहहावा को दिया है।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने ‘देश ए राशन कार्ड’ को अपनाने का मौका भी बताया, क्योंकि कोरोनवीरी वायरस देश में लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को स्थानांतरित कर दिया। इन राज्यों में, पूर्ण राशन कार्ड के साथ आधार विवरण को जोड़कर, पीडीएस स्टोर्स में सेल मशीन के बिंदु को स्थापित करने के लिए, पोर्टेबिलिटी लॉन्च करने के लिए राशन कार्ड महत्वपूर्ण हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, गोवा, जेएच, सहित प्रक्रिया पहले ही 17 राज्यों / परिषद क्षेत्रों में पूरी हो चुकी है।

ये भी पढ़ेंराशन वितरण को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की अलग-अलग घोषणाओं से कई उपभोक्ता गफलत में हैं। आलम यह है कि राज्य खाद्य योजना अधिनियम के लाभार्थी भी कोटेदारों से राष्ट्रीय खाद्य योजना की तरह मुफ्त राशन देने की मांग कर रहे हैं। जिससे राशन डीलरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर रोजाना किसी न किसी राशन की दुकान में विवाद की बात सामने आ रही है।

प्रदेश में कुल 23 लाख राशन कार्डधारक हैं। जिनमें 10 लाख कार्डधारक राज्य खाद्य योजना अधिनियम और बीपीएल व अंत्योदय के 13 लाख कार्डधारक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत पंजीकृत हैं। एनएफएसए के अंतर्गत आने वाले कार्डधारकों को राशन केंद्र सरकार जबकि राज्य खाद्य योजना का राशन राज्य सरकार उपलब्ध कराती है। लॉकडाउन लागू होने के बाद राशन कार्डधारकों को राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग घोषणा की। केंद्र सरकार जहां एनएफएसए के राशन कार्डधारकों को नियमित राशन के अलावा तीन महीने (अप्रैल, मई, जून) तक प्रति यूनिट पांच किलो चावल और एक किलो अरहर की दाल मुफ्त उपलब्ध करा रही है।,

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