इंडिया टीम हारने की वजह से रविंद्र जडेजा बन गए हीरो, जानिए कैसे

आईसीसी के विश्वकप के सेमीफाइनल में टीम इंडिया न्यूजीलैंड के हाथों बुरी तरह हार गई है नह विराट का बल्ला चला नह रोहित का मगर जब विराट के शेर ताश के पत्तों की तरह है

तब रविंद्र जडेजा एक योद्धा की तरह से लड़े और ऐसे लड़े की न्यूजीलैंड के कप्तान को केन विलियमसन को पसीना आ गया यह बात खुद मैच खत्म होने के बाद केन विलियमसन ने एक बड़े जाने डरा दिया था और उन्हें लगा कि जडेजा उनके जबड़े से जीत ही चले जाएंगे यह जडेजा ही थे जिन्होंने 130 के स्ट्राइक रेट से 59 गेंदों में 77 रनों की पारी खेली इस पारी में जडेजा ने 4 गगनचुंबी छक्के भी लगाए टीम इंडिया की हार पर कई सवाल भी है

कि जब जडेजा न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को आराम से खेल रहे थे तो बाकी के बल्लेबाजों को खेलने में क्यों दिक्कत है क्योंकि जब जडेजा चौके और छक्के लगा रहे थे तब धोनी को सिंगल लेने तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था सिर्फ धोनी ही नहीं हर बॉल पर छक्का लगाने का दम भरने वाले हार्दिक पांड्या को समझ ही नहीं आया

कि वह वनडे खेल रहे यह टेस्ट मगर जडेजा अंत तक लड़े और खूब लड़े अगर जडेजा आउट नहीं होते तो न्यूजीलैंड मैच नहीं जीता पाता टीम इंडिया की हार से भारतीय प्रशंसक मायूसी लेकिन सोशल मीडिया पर रविंद्र जडेजा की कोशिश की तारीफ हो रही है कुछ लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं की जडेजा उठ नहीं होते तो भारत यह मैच नहीं हारता मगर सच यह भी है

मैच एक खिलाड़ी के बूते नहीं जीता जाता पूरी टीम मैच जीता है मगर यह बात एक 1 रन बनाने वाले विराट रोहित और खेल राहुल को कहां समझ जाएगी जिन्हें देखकर लगा ही नहीं कि वह वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल खेल रहे हैं अगर पड़ता तो गली के बच्चों की तरह नहीं खेलते पूरा वर्ल्ड कप निकल गया मगर विराट कोहली के बल्ले से एक शतक तक नहीं आया वैसे तो वह खूब शतक लगाते हैं

हर दूसरे मैच में मगर वर्ल्ड कप में उन्हें पता नहीं क्या हो जाता है यह बात विराट कोहली को खुद से ही पूछनी होगी कुल मिलाकर सार यही है कि सेमीफाइनल में जड़ेजा को छोड़कर सही है किसी ने अच्छे से नहीं खेला एक सच्चे योद्धा की तरह खेले और हार कर भी हीरो बन गए

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