ऐसी कौन सी फिल्म है, जो कभी रिलीज़ ही ना होती तो ज्यादा अच्छा होता?

ऐसी दो फिल्में है जो न रिलीज होती तो अच्छा होता । इनके मेकर्स से फ़िल्म मेकिंग का लाइसेंस छीन लेना चाहिए । वो फिल्मे है शकुंतला देवी और मिशन मंगल ।

शकुंतला देवी जी की बायोपिक एक मजाक है बियोपिक्स के नाम पर । इन्होंने शकुंतला देवी की जर्नी और टैलेंट कम माँ – बेटी का झगड़ा ज्यादा दिखाया है । जब इस फ़िल्म की अनाउंसमेंट हुई तो ख़ुशी हुई कि चलो किसी को तो याद आयी शकुंतला देवी की ।

क्योंकि हमने तो शकुंतला देवी के बारे में 15 रुपये की जनरल नॉलेज में पढ़ा था । ह्यूमन कैलकुलेटर कौन था – शकुंतला देवी । हमारी स्कूल की बुक्स में भी इनको खास जगह नही दी गयी है । अगर आपने यह फ़िल्म नही देखी तो मत देखना, इस फ़िल्म को देखने से बेहतर होगा कि आप यूट्यूब पर शकुंतला देवी जी का 15 मिनट का वीडियो देख ले । अगर आज शकुंतला देवी जी जीवित होती तो इस इंटरनेट और सोशल मीडिया के युग में उनको वो सम्मान मिलता जो उनके ज़माने ने उनको नहीं दिया |

मिशन मंगल फ़िल्म ने हमारे इसरो के साइंटिस्ट का मजाक उड़ाया है । इस फ़िल्म में एक साइंटिस्ट को मुसलमान होने के कारण घर नही मिल रहा है, एक साइंटिस्ट का बेटा मुस्लिम बनाना चाहता है क्योंकि उसका आइडल एआर रहमान हिन्दू से मुस्लिम कन्वर्ट हुआ है, एक वैज्ञानिक को विज्ञान में कम ज्योतिशास्त्र में ज्यादा यकीन है, मतलब कुछ भी चल रहा है ।

सोचिए, आज से 10 या 15 साल बाद जब कोई आप से पुछेगा की ये मिशन मार्स इंडिया ने कैसे किया था, आप उसको यह फ़िल्म देखने के लिए नही कह सकते । क्युकी यह फिल्म इतनी बुरी है | जिस तरह से अगर कोई आपसे पूछे भगत सिंह के बारे में तो आप उसको “द लीजेंड ऑफ़ भगत सिंह” देखने के लिए कह सकते है | यह फ़िल्म उन साइंटिस्टों का मजाक है जिन्होंने दिन रात इस मिशन पर मेनहत की ।

अक्षय कुमार अगर चाहते तो इस फ़िल्म का बजट बढ़ाकर, इस मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों की असली संघर्ष पर फ़िल्म बनाते तो शायद आज हमको गर्व होता इस फ़िल्म पर । लेकिन अक्षय कुमार को पैसे से मतलब है, अक्षय अपनी लाइफ में इस डायलाग का खूब पालन करते है, “जब तक इस देश मे सिनेमा है, लोग चूतिया बनते रहेंगे, और मैं बनाता रहूंगा” |

अगर आपको अपना खून जलना है तो कृपा करके इन दोनों फिल्मों को देखे । कम से कम १० ग्राम खून जल ही जायेगा |

डिअर बॉलीवुड, हर फिल्म में नाचना गाना जरुरी नहीं है, खासकर बायोपिक और साइंस फिक्शन फिल्मो में | आप रोमांटिक,एक्शन, कॉमेडी फिल्मे बनाये और उसमे जमकर नाचे गाये |

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