काला पानी से क्या समझते हैं? जानिए

काला पानी – अंडमान निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में एक जेल है जिसका नाम सेल्युलर जेल है। अंग्रेजो के शासन काल मे जिन अपराधियों और स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को कडी सजा देनी होती थी उन्हे उस जेल में भेज दिया जाता था । जिसे काला पानी की सजा कहा जाता था । यह भारत भूमि से हजारो किलोमीटर और समुद्र में भी हजार किलोमीटर दूर है। काला पानी इसलिए कहा जाता था क्योंकि यह जेल भारत की मुख्य भूमि से हजारों किलोमीटर दूर स्थित थी. राजधानी पोर्ट ब्लेयर में जिस जगह पर यह जेल बनी हुई थी उसके चारों ओर पानी ही पानी भरा रहता था क्योंकि यह पूरा क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के अंतर्गत आता है।


सेल्यूलर जेल की संरचना के बारे में
सेल्यूलर जेल में तीन मंजिल वाली 7 शाखाएं बनाई गईं थी, इनमें 696 सेल तैयार की गई थीं हर सेल का साइज 4.5 मीटर x 2.7 मीटर था. तीन मीटर की उंचाई पर खिड़कियां लगी हुई थी अर्थात अगर कोई कोई कैदी जेल से बाहर निकलना चाहे तो आसानी से निकल सकता था लेकिन चारों ओर पानी भरा होने के कारण कहीं भाग नही सकता था.

इस सेल्यूलर जेल के निर्माण में करीब 5 लाख 17 हजार रुपये की लागत आई थी.इसका मुख्य भवन लाल इटों से बना है, ये ईंटे बर्मा से यहाँ लाई गई थीं जो कि आज म्यांमार के नाम से जाना जाता है. जेल की सात शाखाओं के बीच में एक टॉवर है. इस टॉवर से ही सभी कैदियों पर नजर रखी जाती थी. टॉवर के ऊपर एक बहुत बड़ा घंटा लगा था. जो किसी भी तरह का संभावित खतरा होने पर बजाया जाता था.

यहाँ पर कौन कौन क्रांतिकारियों ने सजा काटी है?
सेल्यूलर जेल में सजा काटने वालों में कुछ बड़े नाम हैं- बटुकेश्वर दत्त,विनायक दामोदर सावरकर, बाबूराव सावरकर, सोहन सिंह, मौलाना अहमदउल्ला, मौवली अब्दुल रहीम सादिकपुरी, मौलाना फजल-ए-हक खैराबादी, S.चंद्र चटर्जी, डॉ. दीवान सिंह, योगेंद्र शुक्ला, वमन राव जोशी और गोपाल भाई परमानंद आदि. सेल्यूलर जेल आज एक पर्यटन स्थल बन चुका है।

सेलुलर जेल संग्रहालय, दुनिया भर के पर्यटकों के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लिए एक प्रमुख और सबसे आकर्षक दर्शनीय स्थल है, जिसमें राष्ट्रीय स्मारक घर, स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें और प्रदर्शनी गैलरी, आर्ट गैलरी और स्वतंत्रता आंदोलन के ऊपर एक पुस्तकालय भी शामिल हैं।

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