कोंकण रेलवे के बारे में कुछ रोचक तथ्य क्या हैं? जानिए

वर्ष 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कोकण रेलवे की शुरुआत की थी। एक जमाना था जब रेल मार्ग से मुंबई-केरल के बीच करीब 46 घंटों का सफर करना पड़ता था, कोकण रेलवे के बाद नया रूट खुला। अब मुंबई से केरल जाने के लिए रेल मार्ग से करीब 36 घंटे लगते हैं।

इस लिहाज से यात्रा सुखद हुई है। इस शुरुआत का एक और सुखद पहलू है कि रेल आने से पूरे कोकण क्षेत्र का समग्र विकास हुआ है। 20 सालों में केरल, गोवा और कर्नाटक के तटीय हिस्सों में पर्यटन बढ़ा है। इसका लाभ स्थानीय लोगों को मिल रहा है।

इन्हीं क्षेत्रों से लोग पहले मुंबई पलायन करते थे। अब उन्हें अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं। कोकण क्षेत्र से मुंबई जाने के लिए पहले बस से जाने वाले लोग अब रेल मार्ग से जाने लगे हैं। यही उपलब्धि कोकण रेलवे की यात्रा को एक सुखद अनुभव देती है।

कोंकण रेलवे एक रेलवे लाइन है जो अरब सागर और पश्चिमी घाट के समानांतर भारत के पश्चिमी तट के साथ चलती है। यह रेल मार्ग कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन द्वारा निर्मित और संचालित है। रेलवे लाइन महाराष्ट्र के रोहा से कर्नाटक के थोकुर तक फैली हुई है, अपने पूरे सफर के दौरान, यह कई नदियों, पहाड़ों और अरब सागर से गुजरता है, जिससे रेलवे ट्रैक का निर्माण लगभग असंभव सा लगता था .

यात्रा के दौरान कुछ शानदार प्राकृतिक दृश्यों की झलक दिखती है कयुकि यह रेलवे लाइन एक तरफ अरब सागर और दूसरे पर पश्चिमी घाट के बीच में फैली हुई है, इसलिए इस रेलवे ट्रैक को पूरा करने के लिए 2000 पुलों और 92 सुरंगों की आवश्यकता थी।

कोकण रेलवे के 741 किमी लंबे रूट में करीब 91 टनल और 2 हजार से ज्यादा छोटे-मोटे पुल हैं। शुरुआत में जब इस रूट से 4-5 ट्रेनें चलती थीं, तब जितनी परेशानी होती थी, उसके मुकाबले अब नहीं होती है। अब इस रूट से हर मौसम में करीब 51 ट्रेनें रोजाना गुजरती हैं।कोकण रेलवे में 51 प्रतिशत हिस्सा भारतीय रेलवे का और 22 प्रतिशत महाराष्ट्र, 15 प्रतिशत कर्नाटक, 6 प्रतिशत गोवा और 6 प्रतिशत केरल का है।

महाराष्ट्र में लंबाई: कोंकण रेलवे का प्रमुख हिस्सा महाराष्ट्र राज्य में स्थित है और यह 375 किमी रेलवे लाइन साझा करता है। रोहा से शुरू होने वाला, आखिरी स्टेशन जो महाराष्ट्र में है। महाराष्ट्र में महत्वपूर्ण स्टेशन रोहा, चिपलून और रत्नागिरी हैं।

गोवा में लंबाई : अन्य दो राज्यों की तुलना में गोवा में काफी कम हिस्सेदारी है। गोवा में निर्माण कार्य करते समय बड़ी चुनौतियों का सामना किया गया। गोवा में बहने वाली नदियों के माध्यम से रेलवे लाइन को पार करने के लिए कई पुलों का निर्माण किया गया था। गोवा में ज़ुआरी नदी पर पुल 1319 मीटर लंबा है। गोवा में रेलवे लाइन की कुल लंबाई 110 किमी है जो पेरनेम रेलवे स्टेशन से अशनोती तक शुरू होती है, मडगाँव मुख्य रेलवे स्टेशन है।

कर्नाटक में लंबाई: कर्नाटक में, कोंकण रेलवे का अंतिम स्टेशन ठोकुर है, हालांकि लाइन मंगलौर रेलवे स्टेशन की ओर जाती है जिसे दक्षिणी रेलवे द्वारा प्रबंधित किया जाता है। कर्नाटक में रेलवे लाइन की कुल लंबाई 245 किमी है। उडुपी और कारवार कर्नाटक के महत्वपूर्ण स्टेशन हैं।

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