गरीब की उड़ान ( बेहतरीन मोटिवेशनल कहानी)

एक छोटे से गांव में सिक्कु नाम की एक औरत रहती थी। वो बहुत ही गरीब थी और किराए के घर में रहती थी। उसके पति को गुजरे हुई 2 साल हो गए। उसके पास एक लड़का भी था। उसका नाम सिक्कू ने राजेश रखा था। राजेश पढ़ाई में बहुत ही होसियार था। पति के गुजर जाने के बाद से ही घर चलाने की सारी जिम्मेदरियां सिक्कु के ऊपर आ गई। साथ में राजेश की पढ़ाई का बोझ भी था। सिक्कु दूसरों के घर पर जाकर काम किया करती थी और साथ में अपने बेटे को भी ले जाया करती थी।

राजेश वहां पर बैठे-बठे लोगों के घर आए अखबारों को बहुत ही ध्यान से पढ़ता था। एक दिन जब राजेश अखबार पढ़ रहा था तब उस घर की मालकिन ने राजेश को बहुत बेइज्जत किया कहा था कि अखबार पढ़कर तुम कलेक्टर नहीं बन जाओगे। राजेश की मां को यह बात बहुत बुरी लगी। सिक्कु ने काम छोड़ दिया और शादियों में रोटियां बनाने लगी। रोटी बनाने के लिए वह रोज सुबह 3:00 बजे उठती थी और उसके साथ ही राजेश भी उड़ता था और अपनी मां की मदद करता था और बाद में पढ़ने के लिए बैठ जाता था।

1 दिन सुबह मकान मालिक सिक्कु के घर आया और कहा कि तुम रोज सुबह 3:00 बजे उठ जाती हो और घर की लाइट जला देती हो इसके कारण बिजली का बिल बहुत ज्यादा आ रहा है तुम्हें किराया ज्यादा देना होगा और अगर किराया नहीं देना चाहती तो फिर मकान खाली कर कर चली जाओ। उसके बाद से राजेश लालटेन जलाकर पढ़ने लगा और उसकी मां भी उस लालटेन के उजाले से ही रोटियां बनाने लगी। कुछ सालों बाद राजेश अपनी क्लास में फर्स्ट आने लगा। राजेश की पढ़ाई में लगन देखकर उसके गुरु जी ने राजेश को दिल्ली जाने की सलाह दी और राजेश का सारा खर्चा खुद उठाने की भी जिम्मेदारी ली।

राजेश उस समय 22 साल का था राजेश दिल्ली चला गया और वहां जाकर खूब पढ़ाई की । किंतु परीक्षा देने वाले दिन राजेश रोड क्रॉस कर रहा था तब कोई गाड़ी वाला राजेश को टक्कर दे कर चला गया। जिसके कारण राजेश के सर पर और बाएं हाथ पर चोट आई। राजेश ने परीक्षा अपने दाएं हाथ से दी और परीक्षा देने के बाद आर्यस ऑस्पिटल चला गया। राजेश ने अस्पताल में भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और इंटरव्यू देने चला गया फिर उसके कुछ दिनों बाद राजेश मां के पास गांव वापस चला गया। वहां जा कर रहे अपनी मां के साथ रहने लग गया फिर कुछ दिनों बाद जब उसकी परीक्षा का परिणाम आया तो उसमें राजेश अव्वल आया था। राजेश कलेक्टर बन चुका था।

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