चुनाव आयोग में सदस्यों की नियुक्ति कार्यपालिका की ओर से किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी हुई दाखिल

चुनाव आयोग में सदस्यों की नियुक्ति कार्यपालिका की ओर से किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल हुई है। याचिका में कहा गया है कि लॉ कमिशन की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कॉलिजियम सिस्टम से होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में एडीआर की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया है कि चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र सेलेक्शन कमिटी का गठन किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट में एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) ने याचिका दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार की ओर से चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करना संविधान के अनुच्छेद-14 व अनुच्छेद 324 (2) का उल्लंघन है।

क्‍या हो सेलेक्‍शन का तरीका?
याचिका में कहा गया है कि इन नियुक्तियों के लिए निर्देश दिया जाए कि एक स्वतंत्र कॉलिजियम सिस्टम हो या स्वतंत्र निष्पक्ष सेलेक्शन कमिटी हो जो चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियां करे।

लॉ कमिशन ने 255वीं रिपोर्ट में मार्च 2015 में कहा था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति स्वतंत्र कॉलिजियम या सेलेक्शन कमिटी द्वारा होना चाहिए। कॉलिजियम में पीएम, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को रखने की सिफारिश की गई थी।

क्‍यों है जरूरत?
याचिका में कहा गया है कि चुानव आयोग न सिर्फ स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है, बल्कि उसका अर्ध्य न्यायिक कार्य भी है। ये काम सत्ताधारियों और अन्य राजनीतिक दलों के बीच करना है। ऐसे में कार्यपालिका को अकेले ये अधिकार नहीं होना चाहिए कि वह चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए काम करे।

याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया है कि अभी चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति की वर्तमान प्रक्रिया पूरी तरह से एग्‍जीक्‍यूटिव प्रक्रिया है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि चुनाव प्रक्रिया शुद्ध हो और इसके लिए संविधान बनाने वालों ने ये सोचा था कि चुनाव फ्री और फेयर हो। उसमें किसी तरह से राजनीतिक और एग्‍जीक्‍यूटिव का दखल न हो।

चुनाव आयोग में मेंबरों की नियुक्ति अगर पिक एंड चूज होगी तो यह संविधान के अवधारणा के खिलाफ जाएगा। लोकतंत्र संविधान का मूल स्ट्रक्चर है। फ्री और फेयर चुनाव कराना चुनाव आयोग की ड्यूटी है। ऐसे में चुनाव आयोग में किसी भी तरह से एग्जीक्यूटिव का दखल नहीं होना चाहिए। न ही कोई राजनीतिक दखल होना चाहिए।

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