नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को किस उद्देश्य से मारा था?

महात्मा गांधी के तथाकथित भक्तों को नाथूराम गोडसे का अहसान मानना चाहिए। यदि गांधी जी एकाध साल और जीवित रह जाते तो सारा देश उनका विरोधी हो जाता।

जो हाल ईराक में सद्दाम हुसैन और रूस में लेनिन की मूर्तियों का हुआ वही भारत में गांधी जी की मूर्तियों का होता।लोग उन मूर्तियों को जूते मारते और जेसीबी लगाकर उन्हें धूल धूसरित कर दिया जाता।

कुछ लोगों को नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहने में भी आपत्ति है।मेरा उनसे करबद्ध निवेदन है कि एक बार नाथूराम गोडसे के अंतिम बयान को पढ़ लें,जिसे डरपोक नेहरू सरकार ने प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया था।

कुछ लोग गोडसे को आतंकवादी बताते हैं। गोडसे ने कोई दहशत नहीं फैलाई। पहली पेशी में ही अपना अपराध स्वीकार कर लिया। असली आतंकी तो उस समय की सरकार थी। गांधीजी को अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया?

गांधीजी के शव का पोस्टमार्टम क्यों नहीं किया गया? पुणे में छः हजार चितपावन ब्राह्मणों को चुन चुन कर किसने मारा?

नाथूराम गोडसे एक राष्ट्रवादी युवक था जिसे भारत के सपूतों/बेटियों की चिंता थी।

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