न्यूक्लियर पावर प्लांट की चिमनी इतनी चौड़ी क्यों होती है?

ये चिमनी नहीं हैं। इसे कूलिंग टॉवर कहा जाता है। बड़े बिजली संयंत्र बड़ी मात्रा में गर्मी का पैदा करते हैं, लेकिन इसका लगभग आधा ही उपयोग होता है । इनको पिघलने से बचने के लिए शेष गर्मी को रोकना पड़ेगा , इसलिए वे इसे पर्यावरण में छोड़ देते हैं।

वे इसे ऐसे करते हैं

यदि आसपास कोई बड़ी नदी है, तो वे पानी का उपयोग करते हैं। लेकिन अगर नहीं, है तो वे वाष्पीकरण द्वारा गर्मी छोड़ने के लिए इन बड़े चिमनी-जैसे टावरों का निर्माण करते हैं। हां, ये चिमनी भाप और वाष्प छोड़ती हैं, धुआं या विकिरण नहीं। और इतने बड़े टावर क्यों? टॉवर के निचले हिस्से में गर्म पानी से हवा गर्म होने लगती है और टावर के अंदर उठना शुरू हो जाती है,

इसी तरह गर्म हवा का गुब्बारा ऊपर उठता है। यह “प्राकृतिक ड्राफ्ट” नीचे की ओर खुली हुई आरी -तिरछी खिरकी के माध्यम से ताजी हवा को खींचता है, जो वाष्पीकरण द्वारा गिरते हुए पानी को ठंडा करता है, और बचे हुए पानी को पूल के माध्यम से पावर प्लांट में ठंढा होने के लिए छोड़ देता है । टॉवर को इतनी बड़ी मात्रा में हवा की आवश्यकता होती है जो कि संयंत्र द्वारा गर्म पानी की भारी मात्रा को ठंडा करने के लिए आवश्यक हो ।

जितनी मात्रा में बिजली संयंत्र में पानी का उपयोग होता है ये , उतना सस्ता नहीं है, क्योंकि यह अत्यधिक शुद्ध होता है। ज्यादातर मामलों में, इसे री-प्रोसेस करना ज्यादा फायदेमंद होता है ।

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