भारत में एम्बेसडर कार बनना बंद क्यों हो गया ? जानिए

भारत में एम्बेसडर कार बिरला समूह की हिंदुस्तान मोटर्स बनती थी। इस कार का उत्पादन 1958 से 2014 के बीच हुआ। यह कार ब्रिटिश मॉरिस ऑक्सफोर्ड सीरीज III पर आधारित था।

मतबल इसकी तकनीक ब्रिटेन से भारत लायी गयी थी और उसके बाद यह कार भारत में हिंदुस्तान एम्बेसडर नाम से बनने लगा। यह कार भारत में बहुत ही चली। आईये ब्रिटिश मॉरिस ऑक्सफोर्ड सीरीज III की एक फोटो देखते है।

यह 2013 की एम्बेसडर कार है। समय के साथ इस कार में बहुत सारे बदलाव किया गया जैसे इंजन , अन्य कल पुर्जे इत्यादि ताकि यह भारत सरकार के मानकों को पूरा कर सके लेकिन बहार से देखने पर 2014 की एम्बेसडर कार 1958 के एम्बेसडर कार से बहुत मिलती जुलती थी।

आपने टोयोटा की विश्व प्रसिद्द कोरोला कार का नाम तो सुना होगा। यह रही 1950 के दशक को कोरोला।

यह रही 2014 की कोरोला कार।

आपने तो देख ही लिया होगा कि समय के साथ टोयोटा कोरोला कितना बदल गया लेकिन बाहर से देखने पर एम्बेसडर कार में बहुत अधिक बदलाव नहीं आया था। पहले भारत में परमिट राज चलता था जिसमें सरकार किसी कंपनी को कोई चीज एक मात्रा में बनाने का लाइसेंस देती थी। और जनता के पास उस वस्तु को खरीदने के अलावा कोई चारा नहीं होता था।

इसलिए कंपनी भी उसकी गुणवत्ता सुधारने में बहुत ध्यान नहीं देती थी। उपर से सरकारी क्षेत्र में एम्बेसडर कार की बहुत मांग थी तो हिंदुस्तान मोटर्स ने इस कार को अच्छा बनाने के लिए अनुसन्धान पर अधिक पैसा नहीं खर्च किया। 1991 में परमिट राज खतम हुआ और कार के क्षेत्र में बहुत तेजी से भारत और विदेशी कम्पनियाँ आयी और हिंदुस्तान मोटर्स पिछरता चला गया। अंत में 2014 में कंपनी ने एम्बेसडर कार को बंद करने का फैसला किया।

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