भारत में सबसे तेज मिर्ची कौन सी है? जानिए

कोई भी पकवान जब तक पूरा नहीं होता, जब तक उसमे मिर्च का रंग ना हो, वह फीका ही लगता है, लोग रंग देख कर ही भोजन का चुनाव करते है।

यही कारण है कि भारत में मिर्च की खेती बड़े पैमाने पर होती है। लोग अपने किचन गार्डन में, दूसरी सब्जियों के साथ मिर्च उगाना पसंद करते है।

हमारे यहां बहुत प्रकार की मिर्च की पैदावार है। कुछ में बिल्कुल तीखापन नहीं होता। कुछ सिर्फ आचार के लायक होती है। जिनका लोग साल भर इंतजार करते है।

कुछ इतनी तीखी होती है, कि खाने वालों के चारों तरफ से धुआं निकलने लगता है यानि पसीने छूट जाते है।

उस मिर्च का नाम है ” भूत जोलकिया”

इस ” घोस्ट”, ‘ पेप्पर’ भी कहा जाता है। इसके अलावा इसे ” यू _मोरोक,”लाल नागा’ और ” नागा जोलोकिया” के नाम से भी जाना जाता है।

ये मिर्च भारत की सबसे तीखी मिर्च मानी जाती है। इस मिर्च मे सामान्य मिर्च की अपेक्षा 400 गुना ज्यादा तीखापन होता है।

इसकी खेती भारत में असम, नागालैंड और मणिपुर में होती है।

ये मिर्च का पौधा,45 से 120 सेंटीमीटर ऊंचा होता है और फल 2.4 से 3.3 इंच लंबे व 1 से 1.2 इंच मोटा होते है।

बुवाई से 75 से 90 दिनों में इसके फल तोड़ने लायक हो जाते है।

ये कभी कभी, गुवाहाटी के सब्जी बाजारों मे भी उपलब्ध रहती है, खास कर जब इतवार के सब्जी बाज़ार लगते है।

उसमे गुवाहाटी के आस पास गांव से, और शिलांग से लोग साबुत मसाला बेचने आते है जैसे: काली मिर्च, दाल चीनी ( जिसके पेड़ चेरा पूंजी में बहुत पाए जाते है) बड़ी इलायची(काली) जिसकी पैदावार अरुणाचल में बहुत होती है।

काली मिर्च, जो अभी कच्ची (हरी) है;

शिलांग में हल्दी की पैदावार बहुत है। माफ़ करना, साथियों मै ये सब चीजे लाती रहती हूं, लेकिन कभी फोटो नहीं खीची, क्योंकि यहां रहते हुए, ये सब आम ही लगता है।

अब सोचती हूं कि खींची होती, तो शायद आप लोगों को दिखा पाती।

गुवाहाटी से शिलांग जाते समय छोटी छोटी दुकानों पर, आपको आचार की शीशियां रखी दिखाई देंगी। दूर से देखने में वह बहुत सुंदर दिखाई देती है। उसमे बहुत से आचार बांस और मिर्च के होते है।

2007 में इस मिर्च का नाम ” गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ” में भी दर्ज किया गया था।

सुना है, ये इतनी तीखी होती है कि सिर्फ सूंघने से ही इसका बहुत असर होता है।

“भूत झोलकिया” मिर्च का उपयोग खान पान के अलावा बढ़ते क्राइम को रोकने के लिए भी किया जाता है, जैसे

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ( डी आर डी ओ) ने भूत झोलकीया मिर्च का इस्तेमाल किया। इस संगठन ने इस मिर्च से ” मिर्च स्पे” को तैयार किया। जो महिलाओं के आत्मरक्षा के लिए काम आएगा।

इसको तैयार करने का काम डी आर डी ओ की तेजपुर यूनिट द्वारा किया गया।

इसके अतिरिक्त ” भूत झोलाकिया” मिर्च का उपयोग देश की सुरक्षा बल द्वारा उपद्रवियों के खिलाफ किया जाता है।

सीमा सुरक्षा बल, यानि बी एस एफ की ग्वालियर, टेकनपुर स्थित स्मोक यूनिट इस मिर्च के इस्तेमाल से आंसू गैस के गोले तैयार करती है। जो उपद्रवियों को अलग थलग करने के काम आती है। इन गोलों को उपद्रवियों पर दागने से, आंखों पर तेज जलन होती है और दम घुटने लगता है, पर इससे शरीर पर कोई नुकसान नहीं होता।

आप लोगो के ज्ञान के लिए, मिर्च से संबंधित, कुछ जरूरी जानकारियां :

” भूत जोलोकिय” का नाम ” गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ” में शामिल जरूर हुआ था, पर २०११ में ” इन्फिनिटी चिली” और उसके बाद 2012 में ” नागा वाइपर” नाम की मिर्च भी ” गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड” के अनुसार सबसे ज्यादा तीखी मिर्च मानी गई थी।

इस सबके अलावा दुनिया की सबसे तीखी मिर्च” केरोलिना रीपर ” को बताया गया है। ये आकार में शिमला मिर्च जैसी, मिलती जुलती होती है। इसका नाम भी ” गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड” में दर्ज है।

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