महात्मा गांधी के बारे में कौन सी अफवाहे फैलाई गई हैं?

यह ऐतिहासिक मामला है और चूंकि अप्रमाणित को अप्रमाणित कहने के लिए तथ्य नहीं लगता बल्कि दावा करने के लिए प्रमाण लगता है, इसलिए यहां सीधे उल्लेख कर रहा हूं। विस्तृत जानकारी वांछनीय हो तो कृपया प्रश्न करें या टिप्पणी में उल्लेख करें।

तो ये हैं सारे झूठ के उल्लेख=>

किसी 55 करोड़ के लिए गांधीजी ने कोई उपवास नहीं रखा यह असल में गोडसे ने अदालत में दावा किया था कि उपवास के पीछे गांधी का इरादा यह था।

गांधी ने वचन नहीं लिया था कि “मेरी लाश पर पाकिस्तान बनेगा”, उन्होंने इस अर्थ में कहा था कि मेरे लिए भारत के विभाजन से मृत्यु बेहतर है।

गांधी जी भगत सिंह को बचाने की हर संभव कोशिश की और इसके लिए पत्र लिखा, दबाव भी डाला। भगत सिंह को फांसी निर्धारित तिथि से पहले अचानक दे दी गई।

विभाजन में गांधी की सहमति अंत तक नहीं थी। उन्हें सरदार पटेल ने देश में फैलते दंगों के नाम पर मनवाया और उन्हें विश्वास था कि भारत पाकिस्तान वापिस एक हो जाएंगे।

गांधी ने किसी कोरिडोर का कोई समर्थन नहीं किया।

गांधी जी ने सत्ता में ना तो हिस्सा लिया ना ही कॉन्ग्रेस को आजादी के आगे पीछे कंट्रोल किया। उनसे सलाह लेने नेहरू, पटेल, मौलाना आते थे तो वह केवल अपना पक्ष रखते थे।

गांधी ने सुभाष चंद्र बोस को अध्यक्ष पद से नहीं हटाया। उनकी हिंसक नीति के लिए सदस्यों ने कॉन्ग्रेस छोड़ने का उपक्रम किया तब उन्हें पद छोड़ना पड़ा। सुभाष ने यह आरोप गांधीजी के प्रभाव पर लगाया।

गांधी जी ने पंजाब में सिक्खों से मुस्लिमों को बख्शने की अपील की जो सफल रही पर उससे पहले ही वे नोआखली में मुस्लिमों से हिन्दुओं को बख्शने की सफल अपील कर चुके थे और दिल्ली में मुस्लिमों को ना भगाए जाने की अपील के पीछे उनका पाकिस्तान जाकर वहां हिन्दुओं को भगाए जाने से रोकने का इरादा था। इसलिए किसी सम्प्रदाय की तरफदारी का आरोप संभव नहीं।

ख़िलाफत आंदोलन टर्की में अंग्रेजी सरकार द्वारा खलीफा को हटाकर अंग्रेजी राज थोपने के विरोध में था ना कि इसका इस्लामिक राज से कोई संबंध था। भारतीयों ने इसका साथ दिया था क्यूंकि यह अंग्रेजी सत्ता का विरोध था।

गांधी जी ने प्रथम विश्व युद्ध में सेना में भारतीय जवानों की भर्ती की सहमति दी थी क्यूंकि वे भावी स्वतंत्र भारत की सेना के अनुभवी जवान बनते। सेना में युवाओं को भेजने के प्रश्न पर जब हिंसा की बात पूछी गई तो उन्होंने ही यह पक्ष रखा कि भारत को अपनी रक्षा के लिए जिस सेना की जरूरत होगी उन्हें पूरी ट्रेनिंग मिले और वे रक्षा के अंतरराष्टरीय स्तर को जान सकें इसलिए यह समर्थन दिया। उस वक्त की मांग डमिनियन स्टेटस थी, पर वह एक माध्यमिक विचार था जिस पर भावी स्वतंत्रता का उनका विचार था। अंग्रेजों के धोखे के बाद द्वितीय युद्ध में गांधी की सहमति जरा भी नहीं थी।

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