मोबाइल कैमरा में BOKEH इफेक्ट क्या है ,जानिए इसके बारे में

Bokeh या बैकग्राउंड ब्लर एक ही चीज़ है जो किसी फोटो के पीछे के आउट ऑफ़ फोकस हुए भाग को दर्शाती है |

पोर्ट्रेट फोटोग्राफी में इसका बड़ा महत्त्व है क्योंकि इससे पूरा फोकस केवल विषयवस्तु पर ही पड़ता है और पीछे का पूरा हिस्सा ब्लर हो जाता है |

पर पोर्ट्रेट के अलावा भी इसे अन्य प्रकार की फोटोग्राफी में प्रयोग में लाया जा सकता है, जैसे यह फोटो देखें जो हमने अपने सोनी A6300 और f1.8 लेंस से ली है जिसमें पीछे का हिस्सा ब्लर हो गया है |

bokeh इफ़ेक्ट के कारण ही फोटो देखने में आँखों को अच्छा लगता है |

Bokeh बनाने का कार्य लेंस द्वारा किया जाता है न कि कैमरे द्वारा और इसके लिए बड़े अपर्चर वाले लेंस की आवश्यकता होती है |

बड़े अपर्चर के कारण ही शैलो डेप्थ ऑफ़ फील्ड [2]बनता है जिससे पूरा फोकस निकट वाले विषयवस्तु पर ही होता है और दूर का बैकग्राउंड ब्लर हो जाता है |

आप हमारा यह उत्तर भी देखें –

फ़ोटो लेते समय बैकग्राउंड में धुंधली लाइट बॉल कैसे बनती हैं? के लिए अनुपम श्रीवास्तव (Anupam Srivastava) का जवाब

अब प्रश्न आता है कि मोबाइल कैमरा में bokeh इफ़ेक्ट कैसे आता है |

एक विशुद्ध DSLR लेंस की अपेक्षा मोबाइल कैमरे के लेंस बहुत ही छोटे होते हैं और न ही उनकी गुणवत्ता उस प्रकार की होती है |

इसलिए bokeh इफ़ेक्ट का काम सॉफ्टवेयर और AI की मदद से किया जाता है |

आज के मोबाइल कैमरा की बात करें तो उनमें दो या अधिक लेंस आते हैं जो अलग अलग फोकल लेंथ के रहते हैं |

जब हम फोटो खींचते हैं (ख़ास कर पोर्ट्रेट मोड पर) तब एक कैमरा आगे के सब्जेक्ट पर फोकस करता है और दूसरा उसका बैकग्राउंड तलाशता है |

जब बैकग्राउंड और फोरग्राउंड में अंतर स्मार्टफोन को समझ आ जाता है तब सॉफ्टवेयर की मदद से बैकग्राउंड वाले क्षेत्र को आउट ऑफ़ फोकस करने का बोला जाता है |

इसलिए आपको अंतिम फोटो ऐसी लगती है कि आपका मुख्य सब्जेक्ट तो शार्प है और बैकग्राउंड में बढ़िया bokeh इफ़ेक्ट आया है |

पर यह तकनीक कुछ बढ़िया स्मार्टफोन में ही कारगर तरीके से काम कर पाती है |

कई बार साधारण फोन हमारे शरीर के कुछ हिस्सों जैसे कान या बाल के आस पास के हिस्सों को भी ब्लर कर देते हैं जो देखने में बिलकुल भी ठीक नहीं लगता है |

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