रामानंद सागर के रामायण के संगीतकार ज्ञानेंद्र जैन क्या अंधे हैं? जानिए

उनका सही नाम रविंद्र जैन था, जी वे नबीना यानि नेत्रज्योति विहीन (अंधा कहना थोड़ा अशिष्ट लगता है) थे।उनको भारत सरकार ने पदमश्री से भी नवाजा था, अंखियों के झरोखे से गीत उन्होंने ही संगीतबद्ध किया है।

इसके अलावा उनकी कृतियों में शामिल हैं सौदागर , चोर मचाए शोर , चितचोर , गीत गाता चल , फकीरा , अँखियों के झरोखे से , दुल्हन वही जो पिया मन भाये , पहेली , दो जासूस , पति पत्नी और वो , इंसाफ का तराजू , नदिया के पार, राम तेरी गंगा मैली और मेंहदी ।उन्होंने अपने गीत गाने के लिए येसुदास और हेमलता का व्यापक रूप से उपयोग किया ।उन्होंने विभिन्न भारतीय भाषाओं में कई धार्मिक एल्बमों की रचना की, जिनमें बंगाली और मलयालम शामिल हैं ।

उन्होंने कई टेलीविजन श्रृंखलाओं के लिए संगीत तैयार किया। रामानंद सागर की रामायण के लिए उनका संगीत प्रतिष्ठित हो गया।टीवी पर उनके कुछ सबसे लोकप्रिय काम हैं श्री कृष्ण , अलिफ़ लैला , जय गंगा मैया , जय महालक्ष्मी , श्री ब्रह्मा विष्णु महेश , साईं बाबा , जय माँ दुर्गा , जय हनुमान , संकट मोचन हनुमान और महा काव्य महाभारत

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