शादी के बाद लड़की के घर में उसके माता-पिता का दखल देना कितना सही है ?

मेरे नज़र में तो लड़की का घर ना तो ससुराल होता है और ना ही मायका। घर तो वो हुआ ना जहाँ हम स्वंत्रता के साथ अपने विचारों को रख सके , भेदभाव ना हो , अपनी मर्जी से अपनी ज़िंदगी को जी सके। कई लोगों का “मर्जी ” शब्द से ये मतलब होता है की आवारगर्दी या मनमानी लेकिन ऐसा नहीं है मर्जी का मतलब है अपनी इच्छा से सही और गलत को समझते हुए ज़िंदगी जीना ना की सास – ससुर, पति या माँ – बाप ने कुछ भी कह दिया और हम उनकी बात को बिना मर्जी के बस माने जा रहे है।

लड़की जैसे अपने माँ पिता का घर छोड़ कर आती है ठीक वैसे ही लड़का भी अपने माँ – बाप का घर छोड़ देता है और पति – पत्नी जब मिलकर तिनका तिनका जोड़ कर खुद का आशियाँ बनाते है तो वही घर लड़की का अपना होता है। खुद के बनाए इस घर में दोनों लिंग भेद के बगैर सम्मान पूर्वक साथ में रहते है तो यहाँ किसी के भी माँ – पिता को दखल देने की आवश्यकता नहीं होती है।

हर सिक्के के दो पहलु होते है और दूसरे पहलु में लड़की अपने सास – ससुर के घर रह रही है और उसके साथ बुरा बर्ताव हो रहा है तो लड़की के माँ – बाप का पूरा हक़ है की वो अपनी बेटी के साथ हो रहे गंदे बर्ताव के खिलाफ अपनी बेटी का साथ दे।

अगर हर लड़की के माँ – पिता ऐसे करें तो दहेज़ के लिए , बेटा पैदा करने के लिए जो अन्याय लड़कियों के साथ होता है उसपे रोक लग सकती है। बेटियां शादी के बाद खुद नहीं मर जाती ससुराल वाले या पति उन्हें मरने पर मजबूर करते है या खुद मार देते है।

मुझे तो समझ में ही नहीं आता की किस ग्रंथ में लिखा है की बेटी के माँ – बाप पराये हो गए और लड़के के माँ – बाप अपने – वाह रे पुरुष प्रधान समाज क्या निति बनाई है शायद लड़के को पैदा करने में ज्यादा पीड़ा होती है इसलिए तो लड़के के माँ – बाप की पदवी ऊंची होती है।

बेटा हो या बेटी सबको अपना बच्चा प्यारा होता है बच्चे पैदा करने में पीड़ा एक समान ही होता है अगर बेटे पर उसके माँ – बाप का हक़ उसकी शादी के बाद भी पहले जितना ही होता है तो लड़की के माँ – बाप का हक़ उनकी बच्ची पर कैसे कम हो गया ?

हर बेटी के माँ – बाप को ये याद रखना चाहिए की उन्होंने बेटी की शादी की है तो सिर्फ इस कारण से उनकी जिम्मेवारी खतम नहीं हो जाती बल्कि और बढ़ जाती है। अपनी बेटी का साथ दे अगर वो गलत कर रही है तो उसे समझाए और अगर उसके साथ गलत हो रहा है तो उसका साथ दे।

जैसे हाथ की पांच ऊँगली एक समान नहीं होती ठीक वैसे ही हर इंसान इक जैसा नहीं होता। कुछ ससुराल वाले अच्छे होते है और कुछ बुरे बहुत बुरे कुछ ठीक – ठाक होते है। ऐसे में लड़की केघर में उसके माँ – पिता का दखल देना सिथ्ति पर निर्भर करता है।

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