साठ ‌वर्ष पूर्व विवाह कैसे होते थे? जानिए

60 वर्ष पूर्व विवाह कैसे होते थे यह तो मुझे नहीं मालूम ।लेकिन मैंने अपनी मम्मी से सुना जरूर है कि वह लोग बहुत छोटे थे और बहुत कम उम्र में लड़कियों की और लड़कों की शादी कर दी जाती थी।मेरी मम्मी की उम्र हार्डली 13 साल की थी जब उनकी शादी हो गई थी हातिम उसी की उम्र के आसपास मेरे पिताजी की भी उम्र होगी या उनसे एक 2 साल बड़े होंगे।

पंडित का मुख्य रोल होता था लड़के का रिश्ता लड़की के परिवार में लेकर के जाता थे और पूरी बात पक्की करते थे। फिर बाद में आपस में दोनों परिवार मिलते थे। उनको बड़ा जिम्मेदारी का काम लड़के के परिवार वाले देते थे और लड़की के परिवार वाले भी देते थे । वह दो परिवारों में अच्छी दोस्ती होती थी तो आपस में रिश्ता तय कर लेते थे कि अगर तुम्हारे यहां लड़का होगा और मेरी बेटी होगी तो दोनों की शादी तय कर देते थे।बचपन में ही मतलब बच्चों के पैदा होने से पहले ही रिश्ते तय कर दिए जाते थे जोकि बड़ी अजीब सी बात है कि जो बच्चे अभी पैदा नहीं हुए आपने उनका भविष्य तय कर दिया। वह क्या करना चाहते हैं उनकी मर्जी तो कभी खैर पूछी नहीं जाती थी।

वह शादी जिस उम्र में की जाती थी जब बच्चे एकदम छोटे छोटे होते थे उनको पता भी नहीं होता होगा कि शादी का मतलब क्या होता है। 60 साल पीछे के बात छोड़ दीजिए आज भी बहुत सारे गांव में शहरों में यह परंपरा चली आ रही है ।बहुत कम उम्र में लड़के और लड़कियों की शादी तय कर दी जाती है। मैं यहां आंध्रप्रदेश में रहती हूं। मेरे घर में काम करने वाली अम्मा यहां पर अम्मा बोला जाता है जो काम करने आती है उनके मुंह से सुनती रहती हूं।13 साल के बच्चे की शादी तय कर दी गई। 14 साल के बच्चे की शादी कर दी ।

यहां तक कि जो मेरी कामवाली बाई है उसकी शादी भी जब 11 साल की थी तब कर दी गई थी तो सोच लीजिए वह 60 साल का रिवाज आज भी चल रहा है। पहले जब शादी की जाती थी तब दहेज प्रथा नहीं थी ।तब यह था कि लड़का और लड़की की नई गृहस्ती शुरू हो रही है तो उन्हें कुछ उपहार स्वरूप बर्तन भाड़े, कुछ गृहस्ती का सामान, स्त्रीधन कन्या को सोना दिया जाता था। बाद में इसने बहुत बड़ा रूप ले लिया और धीरे-धीरे एक दहेज रूपी बुरी प्रथा के रूप में प्रचलित हो गया और अब तो यह हो गया कि अब बिना दहेज के शादी ही नहीं होती। लाखों-करोड़ों में दूल्हे बिकते हैं, खरीदे जाते हैं। जिस दूल्हे की जितनी ज्यादा अच्छी नौकरी अच्छी पोस्ट उसको उतना ज्यादा धन मिलता है।

लड़की की तरफ से अब लड़की वाला अगर देने की हैसियत रखता है तो भी उसे देना पड़ता है। नहीं देना चाहता तो उसकी कन्या के लिए अच्छा वर भी नहीं मिलता ।इतना महंगा दूल्हा खरीद नहीं सकता अब शादियों की परंपरा शोऑफ में बदल गई है। दिखावा बहुत ज्यादा हो गया है ।पहले कन्या को भेजा जाता था तो कहा जाता था ससुराल में बहुत कम उम्र में शादी करने का मेन मकसद यही था कि लड़की छोटी सी उम्र में जाएगी तो वहां जाकर के रस बस जाएगी और परिवार के लोगों को अपना लेगी ।

हालांकि वह गलत था कि एक छोटी सी बच्ची जिसको आप अपने परिवार से इसे किसी चीज की इतनी समझ नहीं आप उसे जबरदस्ती पूरे परिवार की जिम्मेदारी डाल कर भेज देते हैं और आपने अपना पल्ला झाड़ लिया कि भाई मैंने शादी कर दी अपनी बेटी की और उसको एक ज्ञान दे दिया कि भाई तुम्हें तो वहां निभा करके चलना ही है ऐसे ही रहना है अब तुम्हारी उस परिवार से अर्थी निकलनी चाहिए। ऐसा लड़कियों को ज्ञान दिया जाता था ।बेचारी कितनी भी मुसीबतें उठा लेती थी लेकिन लड़की मायके आकर के नहीं रह सकती ।आएगी पड़ोसी पड़ोसी पूछना शुरू कर देंगे क्यों आ गई ..?क्या हो गया ..?कोई बात हो गई क्या ..?यह हमारा समाज है ।

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