साबुन के आविष्कार से पहले अपने कपड़ों से मैल निकालने के लिए लोग क्या उपयोग किया करते थे?

जब मैंने ये सवाल पढ़ा तो विचार आया कि हमारे बाबा जी/दादा जी इस बारे में जरूर कुछ न कुछ बता सकते है और हुआ भी ऐसा ही, उन्होंने कपड़े धोने के 2 तरिके बताये।

1.रीठे के उपयोग से कपड़े धोना-

रीठे जो कि पेड़ पर लगते है। पुराने जमाने में जब रीठे को पानी मे डालकर गर्म करते थे तो रीठे के कारण पानी मे झाग उत्पन हो जाते थे जिसके बाद कपड़े उसमे डाल दिये जाते थे और उसके बाद उनको थपकी(एक प्रकार का बैट कह सकते है) से पीट कर मैल निकला जाता था और कपड़ो का मैल निकल जाता था।

2. रेह या रे से कपड़े धोना-

उन्होंने बताया कि उनके पिताजी खेत(गीले खेत मे) मे एक चीज आपने आप ही उग आती थी जिसको रेह बोलते थे जिसको वे इकट्ठा कर के ले आते थे और फिर रेह को पानी मे डाल देते थे और उसमें कपड़े डाल देते थे। और हाथ से रगड़ से कपड़ो का मैल काफी हद तक साफ हो जाता था।

उन्होंने ये भी बताया कि उस समय सप्ताह में एक बार या उससे भी अधिक बार कपड़े धोए जाते थे।

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