हवाई जहाज हवा में कैसे उड़ता है? तथा इसकी अधिकतम स्पीड सीमा कितनी होती हैं ?

दूर, ऊंचे नीले आसमान में उड़ता हवाई जहाज़ देखना सभी को अच्छा लगता है। बहुत बार हवाई जहाज़ को देखकर तुम्हारे मन में प्रश्न उठता होगा कि इतना बड़ा और भारी हवाई जहाज़ हवा में कैसे उड़ लेता है?

इस बात को समझने के लिए तुम एक आसान-सा प्रयोग करके देखो। कागज़ की एक पतली-सी पट्टी काटकर उसे एक सिरे से पकड़ो। जो सिरा हाथ में है उसे अपने मुंह के पास लाकर पट्टी की ऊपरी सतह पर जोर-से फूंक मारो।

तुम्हें यह देखकर हैरानी होगी कि पट्टी नीचे दबने की बजाए ऊपर की तरफ उठ रही है। और उसे ऊपर बनाए रखने के लिए तुम्हें लगातार फूंक मारते रहना पड़ रहा है। तुम जैसे ही फेंकना बंद कर दोगे, पट्टी वापस नीचे लटक जाएगी।

हवाई-जहाज़ को भी तो उड़ने के लिए पहले हवा में ऊपर उठना पड़ता है और फिर आगे बढ़ना पड़ता है। ऊपर उठने वाला काम उसी सिद्धांत से होता है जिससे इस प्रयोग में कागज़ ऊपर उठा था।

पर फर्क इतना ही है कि उसके ऊपर फूंक मारने के बजाए हवाई जहाज़ को ही तेज़ रफ्तार से दौड़ा दिया जाता है। उड़ान भरने से पहले जहाज़ उड़ान पट्टी पर बहुत तेजी से दौड़ता है। इससे हवाई जहाज़ के पंखों के ऊपर और नीचे की हवा बहती हुई सी ही लगती है।

पर कागज़ की पट्टी के ऊपर फेंक मारने वाले प्रयोग से बात यहीं फर्क हो जाती है। कागज़ की पट्टी के सिर्फ ऊपर की ओर फूंक मारी थी पर यहां तो हवा जहाज़ के ऊपर और नीचे, दोनों तरफ बहती प्रतीत होती है। फिर भी हवाई जहाज़ ऊपर की ओर उठता है। इसके लिए कभी ध्यान से हवाई जहाज़ के पंखों का आकार देखें तो बात कुछ समझ आएगी। या फिर हवाई जहाज़ के पंखो के आकारनुमा कागज़ की आकृतियां बनाकर एक प्रयोग की मदद से भी हम इसे समझ सकते हैं।

कागज़ की दो पट्टियां लो। एक 8 से.मी. x 4 से.मी. की और दूसरी 10 से.मी. x 4 से.मी. की। चित्र में जैसा दिखाया है वैसे बड़ी पट्टी को छोटी पट्टी पर चिपकाओ।

एक तरफ ऊपर से और दूसरी तरफ घुमाकर नीचे से। अब इसके बीच से एक साफ सूजा (या लम्बी सुई) घुसा दो और उसे 5-6 बार सूजे पर ऊपर-नीचे खिसका लो ताकि वह आसानी से उस पर ऊपर-नीचे हो सके।

अब सूजे को चित्रानुसार पकड़कर चौड़ी ओर से मुंह से फूंको। आकृति को गोल-गोल घूमने से रोकने के लिए शायद तुम्हें दूसरे हाथ से उसे दोनों ओर से सहारा देना पड़े। और फेंकते समय ध्यान रखना कि हवा आकृति के ऊपर-नीचे, दोनों ओर से बहे। क्या हुआ फूंकने पर?

ऐसा ही कुछ हवाई जहाज़ के साथ भी होता है। उसमें पंखों का आकार कुछ ऐसा बनाया जाता है कि जहाज़ के दौड़ने पर हवा को पंखों के ऊपर से गुजरने के लिए, नीचे की बनिस्बत ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है। पर दोनों ओर की हवा को समय तो बराबर ही मिलता है इसलिए ऊपर की हवा की रफ़्तार नीचे की हवा से ज्यादा होती है।

इसलिए ऊपर की ओर दबाव कम हो जाता है। और नीचे की हवा ऊपर की ओर उठने की कोशिश में पंखों को धकेलती हुई हवाई जहाज़ को ऊपर उठा लेती है। और जहाज़ फुर्र !

इतने भारी-भरकम जहाज़ को हवा में उड़ाने के लिए उसके ऊपर और नीचे के दबाव में काफी अंतर की ज़रूरत पड़ती है। इसीलिए जहाज़ उड़ान पट्टी पर लगभग 200 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ते हैं।

अब देखते हैं कि हवाई जहाज़ को ज़मीन पर या हवा में दौड़ाने का यह काम किया कैसे जाता है? कुछ विमानों के अगले भाग में घूमने वाले बड़े-बड़े पंखे लगे होते हैं। जब ये पंखे इंजन द्वारा बहुत तेजी से घुमाए जाते हैं, तो हवा को ज़ोर-से पीछे की तरफ धकेलते हैं। और जहाज़ आगे बढ़ने लगता है।

जेट विमान भी इसी सिद्धांत पर चलते हैं पर उनमें इंतज़ाम थोड़ा अलग होता है। इनके इंजनों में ईंधन और हवा के मिश्रणों को जलाया जाता है। जलने से पैदा हुई गैसें बहुत तेजी से विमान के पिछले हिस्से से निकलती हैं। उसके कारण गुब्बारे में से हवा निकलने पर जैसे वह उल्टी दिशा में भागता है, उसी तरह ये विमान आगे को दौड़ने लगते हैं।

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