हाइपरकन्वर्ज्ड (Hyperconverged) टेक्नोलोजी क्या है? जानिए

हाइपरकन्वर्जड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल डाटा सेंटर्स में होता है। कुछ समय पहले यदि कोई अपनी वेबसाइट या सॉफ्टवयर को इंटरनेट पर एक्सेस करवाना चाहता हो तो उसको सर्वर पे होस्ट करके इंटरनेट से कनेक्ट करना होता था। डाटा सेंटर्स हमें ऐसे ही सर्वर उपलब्ध कराते हैं जो हमेशा इंटरनेट से कनेक्ट रहते हैं। हमारी जरूरत के अनुसार इन सर्वर की कैपेसिटी या कॉन्फिग्रेशन हम चुन सकते थे। जैसे जैसे डाटा सेंटर्स के कस्टमर्स बढ़ते हैं वैसे वैसे डाटा सेंटर्स ऑनर्स को फिजिकल सर्वर्स बढ़ाने पड़ते हैं।

समय के साथ देखा गया कि कुछ सर्वर ज्यादा इस्तेमाल होते हैं और कुछ कम। इनके इस्तेमाल होने का समय भी अलग होता है। जैसे कि कुछ सर्विसेज दिन में ज्यादा और कुछ रात में ज्यादा इस्तेमाल होती है। कुछ सर्विसेज साल के कुछ विशेष महीनों में ज्यादा इस्तेमाल होती है जबकि कुछ सर्विस साल के किन्हीं दूसरे महीनों में। इस वजह से कुछ सरवर्स की कैपेसिटी तो कम पड़ जाती है जब उनकी जरूरत पीक पर होती है और कुछ सर्वर्स की केपेसिटी आइडल पड़ी रहती है और यूज़ नहीं हो पाती क्योंकि फिजिकली सबके सर्वर्स अलग-अलग होते हैं।

इस प्रॉब्लम को दूर करने के लिए हाइपरकन्वर्जड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाने लगा। हाइपरकन्वर्जड टेक्नोलॉजी या हाइपरकन्वर्जड इंफ्रास्ट्रक्चर मैं सभी सर्वर्स और उनके प्रोसेसर, रैम और हार्ड डिस्क आपस में फिजिकली कनेक्टेड होते हैं। और यदि इन सभी सर्वर्स की केपेसिटी को मिला दिया जाए तो वह पूरे डाटा सेंटर की कैपेसिटी को निर्धारित करता है। जब भी किसी क्लाइंट को होस्टिंग के लिए सरवर की जरूरत पड़ती है तो इन फिजिकल सर्फर्स के ऊपर वर्चुअल सर्वर्स की लेयर बनाई जाती है। यह वर्चुअल लेयर, वर्चुअलाईजेशन सॉफ्टवेयर द्वारा बनाई जाती है। इसके बाद क्लाइंट को रिक्वायरमेंट के अनुसार फिजिकल सर्वर्स उपलब्ध ना कराते हुए हुए वर्चुअल सर्वर अलॉट किए जाते हैं।

इन वर्चुअल सर्वर्स की मैक्सिमम कैपेसिटी फिक्स कर दी जाती है जैसे कि मैक्सिमम प्रोसेसर, मैक्सिमम रैम और मैक्सिमम हार्ड डिस्क। किसी भी सूरत में क्लाइंट की सर्विसेज इस निर्धारित कैपेसिटी से ऊपर रिसोर्सेज को इस्तेमाल नहीं कर सकती। लेकिन जब क्लाइंट की सर्विसेज निर्धारित रिसोर्सेज से कम रिसोर्सेज को इस्तेमाल करती है तो बाकी के फ्री वर्चुअल रिसोर्सेज हार्डवेयर के रूप में फ्री होता है। और यही फ्री हार्डवेयर उसी समय में किसी दूसरे सरवर में वर्चुअल रिसोर्स की तरह इस्तेमाल हो सकता है।

इस तरह हाइपर कन्वर्ग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके रिसोर्स शेयर करने से रिसोर्स ऑप्टिमाइजेशन अचीव किया जाता है और डाटा सेंटर की ओवरऑल कैपेसिटी कई गुना अधिक बढ़ जाती है।

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